दिल्ली की आप नेता आतिशी ने बुधवार, 13 मई, 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान का पुरजोर बचाव किया, जिसमें उन्होंने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारतीय ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) को नेपाल और बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों से प्रेरणा लेने का आग्रह किया था। आतिशी ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल का इरादा हिंसा भड़काने का नहीं था, बल्कि वे युवाओं से शांतिपूर्ण ढंग से जवाबदेही मांगने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान कर रहे थे।
क्या था केजरीवाल का बयान?
यह पूरा विवाद नीट परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बीच शुरू हुआ था, जिसने देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इसी संदर्भ में, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक टिप्पणी की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह नेपाल और बांग्लादेश में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों ने राजनीतिक बदलाव लाए, उसी तरह भारत के ‘जेन ज़ी’ को भी परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की थी कि वे नीट पेपर लीक के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए आगे आएं। केजरीवाल ने इस बात पर जोर दिया था कि अगर पड़ोसी देशों के युवा राजनीतिक परिवर्तन ला सकते हैं, तो भारतीय युवा भी परीक्षा घोटालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते हैं।
आतिशी ने दी सफाई
केजरीवाल की टिप्पणी पर भाजपा नेताओं की आलोचना के बाद, आतिशी ने तुरंत मोर्चा संभाला और उनके बयान को स्पष्ट किया। एनडीटीवी से बात करते हुए, आतिशी ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हिंसा का सुझाव देने जैसा कोई सवाल है। मुझे लगता है कि आम आदमी पार्टी, और उससे पहले इंडिया अगेंस्ट करप्शन, हमेशा शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल युवाओं से यह मांग कर रहे थे कि वे उन लोगों से जवाबदेही मांगें जो परीक्षा लीक और भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार हैं। आतिशी ने आरोप लगाया कि जहां नीट के उम्मीदवारों को परीक्षाओं के दौरान कड़ी जांच और नियमों का सामना करना पड़ता है, वहीं उन्हें आयोजित करने वालों के लिए शायद ही कोई जवाबदेही होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर युवा अपने अधिकारों, सपनों और उम्मीदों को बिखरने से बचाने के लिए सड़कों पर नहीं आते, विरोध नहीं करते, अपनी आवाज नहीं उठाते, तो यही सब बार-बार होता रहेगा। यह नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद की स्थिति पर उनकी गहरी चिंता को दर्शाता है।
भाजपा की आलोचना और आप का जवाब
अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद, भाजपा नेताओं ने उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने केजरीवाल पर युवाओं को अशांति फैलाने के लिए उकसाने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि इस तरह के बयान देश में अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं और युवाओं को गलत दिशा में ले जा सकते हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया केजरीवाल के बयानों को राजनीतिक रंग देने और उन्हें नकारात्मक रूप में पेश करने का एक प्रयास प्रतीत हुई। हालांकि, आतिशी ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आप प्रमुख लोकतांत्रिक जवाबदेही की बात कर रहे थे, न कि हिंसा की। आतिशी ने भाजपा पर केजरीवाल के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और गलत तरीके से व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नीट पेपर लीक के असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, बजाय इसके कि वह दोषियों को पकड़ने पर ध्यान केंद्रित करे।
युवाओं के अधिकार और आगे की राह
नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य पर गहरा असर डाला है। यह न केवल एक परीक्षा का मामला है, बल्कि उन युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं का भी सवाल है, जो कड़ी मेहनत के बाद भी ऐसी धांधली का शिकार हो जाते हैं। आतिशी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘जेन ज़ी’ के अधिकार, उनके जीवन, उनके सपने और उम्मीदें बिखर रहे हैं। ऐसे में उनका विरोध करना और आवाज उठाना बेहद जरूरी है। केजरीवाल का बयान युवाओं को अपनी लोकतांत्रिक शक्ति का एहसास कराने और व्यवस्था से जवाबदेही मांगने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से था। आगे की राह में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार नीट पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करती है और क्या युवा अपने अधिकारों के लिए इसी तरह से आवाज उठाते रहेंगे। आप नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर छात्रों के साथ खड़े रहेंगे और न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।










