भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के कल्याण को राज्य सरकार का कर्तव्य बताते हुए वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। उन्होंने खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लेने तथा योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा मंत्रालय में आयोजित कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत हुए कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक के दौरान की, जहां उन्होंने आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कृषक कल्याण वर्ष 2026 की घोषणा और उद्देश्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि किसानों का हित सर्वोपरि है और इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। यह घोषणा राज्य सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि खेती की लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने वाली सभी गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू किए गए कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि मिशन मोड में किया जाना चाहिए ताकि उनके वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच सकें। मुख्यमंत्री का यह जोर सरकारी योजनाओं की प्रभावी और त्वरित डिलीवरी पर केंद्रित है।
किसानों से सीधा संवाद और आय वृद्धि के नवाचार
डॉ. यादव ने किसानों के साथ सीधे और प्रभावी संवाद स्थापित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि राजधानी भोपाल से लेकर मैदानी स्तर तक किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। यह पहल किसानों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने और समाधान खोजने में मदद करेगी। दुग्ध उत्पादन को किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बताते हुए मुख्यमंत्री ने उन्नत नस्ल की गायें उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं के सहयोग लेने की बात कही। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादन से संबंधित केंद्रों का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। इसके अतिरिक्त, किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक करने, फसल चक्र में परिवर्तन को प्रोत्साहित करने और प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। यह कदम कृषि क्षेत्र में स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
डिजिटल पहलें और आगामी महोत्सव
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को सुगमता और सरलता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण से किसानों को मिलने वाली सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक देरी समाप्त होगी। यह पहल किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी कार्यकुशलता में सुधार लाएगी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने दो बड़े आयोजनों की भी घोषणा की: सभी जिलों में “बलराम कृषि महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा, जो किसानों को कृषि नवाचारों और सरकारी योजनाओं से अवगत कराएगा। वहीं, संभागीय मुख्यालयों पर “फूड फेस्टिवल” आयोजित किए जाएंगे, जिससे किसानों द्वारा उत्पादित स्थानीय उत्पादों को बाजार और पहचान मिल सके। ये महोत्सव किसानों को एक मंच प्रदान करेंगे और उनके उत्पादों को बढ़ावा देंगे।
मुख्यमंत्री के निर्देश और भविष्य की रणनीति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्वों और त्योहारों, साथ ही फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित करें। यह रणनीति किसानों के सांस्कृतिक और कृषि संबंधी जीवनशैली को समझते हुए बेहतर नीतियां बनाने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका मिशन मोड में प्रभावी क्रियान्वयन ही किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से 2026 तक किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खेती एक अधिक लाभदायक व्यवसाय बन पाएगी। सरकार की यह दूरगामी रणनीति मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक क्रांति लाने का लक्ष्य रखती है।






