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उत्तराखंड

मुख्य सचिव ने की आपदा तैयारियों की समीक्षा, ग्लेशियर झीलों की निगरानी पर जोर

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने 4 मई, 2026 को सचिवालय में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली, राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्लेशियर झील विस्फोट जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम और भूस्खलन न्यूनीकरण के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लेना और संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ तैयार करना था। उन्होंने संबंधित विभागों और संस्थानों को इन सभी परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

समीक्षा बैठक का एजेंडा

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता और हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं के बढ़ते जोखिम को देखते हुए विभिन्न आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यप्रणाली, राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत किए जा रहे प्रयासों और भूस्खलन न्यूनीकरण की रणनीतियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इन कार्यक्रमों का मुख्य लक्ष्य आपदाओं के प्रभाव को कम करना, जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाना है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच सके।

ग्लेशियर झीलों पर विशेष ध्यान

समीक्षा बैठक के दौरान ग्लेशियर झील विस्फोट जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम पर विशेष जोर दिया गया। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी द्वारा इस संबंध में वर्तमान प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि वाडिया संस्थान द्वारा वसुंधरा झील को एक पायलट साइट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम और मॉनिटरिंग मैकेनिज्म स्थापित किए जाएंगे। इस मॉडल को भविष्य में राज्य की अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर भी लागू करने की योजना है, जिससे ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न होने वाले जोखिम प्रबंधन को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया जा सके। हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर झीलों के फटने का खतरा बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ और तबाही का जोखिम रहता है।

आगे की कार्ययोजना और निर्देश

मुख्य सचिव ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी को वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए प्रस्तावित गतिविधियों की विस्तृत टाइमलाइन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस टाइमलाइन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि कौन सा कार्य कब तक पूरा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान को न्यूनीकरण उपायों का भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसमें जोखिमों को कम करने के लिए अपनाई जाने वाली सभी रणनीतियाँ और तकनीकी पहलू शामिल हों। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनका परिणाम प्रभावी हो। उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर किया जाए।

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आपदा प्रबंधन की चुनौतियाँ और तैयारी

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए आपदा प्रबंधन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। भूकम्प, भूस्खलन, बादल फटना और ग्लेशियर झील विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा यहाँ हमेशा बना रहता है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की यह समीक्षा बैठक राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन को केवल प्रतिक्रियात्मक न होकर निवारक बनाने पर जोर दिया, ताकि संभावित खतरों को पहले ही भाँपकर उनका समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा और स्थानीय समुदायों को भी आपदा प्रबंधन के प्रयासों में शामिल करना होगा, ताकि एक मजबूत और लचीला आपदा प्रतिरोधी राज्य बनाया जा सके।

Source: Original Article ↗

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.