भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 32 लाख टन से अधिक प्रमुख उर्वरकों का आयात किया है। यह जानकारी रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी, जिसमें बताया गया कि घरेलू उत्पादन के पूरक के रूप में यूरिया और डी-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के आयात से देश की उर्वरक मांग को पूरा किया गया है। सरकार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधानों के बीच उर्वरक आपूर्ति को सुदृढ़ करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने पर विशेष जोर दे रही है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आयात और उत्पादन
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून 2024 की अवधि में, भारत ने कुल 32 लाख टन से अधिक प्रमुख उर्वरकों का आयात किया। इसमें 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डी-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) शामिल है। इसी अवधि के दौरान, देश का कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 115.72 लाख टन रहा, जिसमें यूरिया का उत्पादन 71.55 लाख टन और डीएपी का उत्पादन 9.84 लाख टन दर्ज किया गया। यह आयात घरेलू उत्पादन के साथ मिलकर देश की कृषि जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंत्री ने लोकसभा में एक संदर्भ के तौर पर बताया कि पिछले एक वित्तीय वर्ष में (संभवतः 2022-23 या उसके आसपास, हालांकि मूल स्रोत में 2025-26 का उल्लेख है जो एक त्रुटि प्रतीत होती है) भारत ने कुल 517.74 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन किया था। उस अवधि में, देश ने 103.50 लाख टन यूरिया और 61.94 लाख टन डीएपी का आयात किया था, जो मौजूदा तिमाही के आंकड़ों की तुलना में काफी अधिक था, यह दर्शाता है कि सरकार आपूर्ति को स्थिर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण की रणनीति
रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार की उर्वरक खरीद रणनीति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों के मद्देनजर देश के आयात आधार को व्यापक बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “सरकार ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।” नड्डा ने यह भी जोड़ा कि सरकार ने आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के बीच दीर्घकालिक वाणिज्यिक व्यवस्थाओं को सुविधाजनक बनाया है। यह रणनीति किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उर्वरक विभाग विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि विभिन्न देशों से आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान की जा सके और किसी एक राष्ट्र पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके।
चीन पर निर्भरता कम करने के प्रयास
सरकार की विविधीकरण रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू चीन पर निर्भरता कम करना है। मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि चीन ने कथित तौर पर भारत को विशेष उर्वरकों का निर्यात रोक दिया है। इस स्थिति के जवाब में, भारतीय कंपनियां सक्रिय रूप से जल-घुलनशील उर्वरकों (water soluble fertilisers) के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं और उन्हें बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से प्राप्त कर रही हैं। यह कदम चीन से कम हुए आयात के कारण हुई कमी को पूरा करने और भारतीय किसानों के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इस तरह के सक्रिय उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि भारतीय कृषि क्षेत्र को किसी भी बाहरी झटके का सामना न करना पड़े और उसे अपनी जरूरतों के अनुसार उर्वरक मिलते रहें।
प्रमुख देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते
आपूर्ति सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए, भारत ने कई प्रमुख देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हैं। जेपी नड्डा ने बताया कि इन उपायों के तहत, भारत ने सऊदी अरब की कंपनियों के साथ प्रति वर्ष लगभग 31 लाख टन डीएपी की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौतों को अंतिम रूप दिया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय उर्वरक कंपनियों ने चालू वर्ष के दौरान लगभग 26.50 लाख टन डीएपी/एनपीके उर्वरकों के आयात के लिए रूसी आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी समझौते किए हैं। ये समझौते भारत की उर्वरक आवश्यकताओं को पूरा करने और भविष्य में किसी भी संभावित कमी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं। मंत्री के अनुसार, रूस, जर्मनी और तुर्कमेनिस्तान से 4.80 लाख टन म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) के आयात के लिए भी अलग से समझौते संपन्न किए गए हैं। ये दीर्घकालिक साझेदारियां भारत की कृषि सुरक्षा के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करती हैं और वैश्विक बाजार की अस्थिरता से बचाव करती हैं।




