LIVE बुधवार, 17 जून 2026
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अंतराष्ट्रीय

भारत ने अमेरिकी छूट विस्तार माँगा: रूसी तेल पर ऊर्जा संकट का दबाव

भारत ने अमेरिका से रूसी तेल आयात पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संकट के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में पिछले 75 दिनों से लगातार व्यवधान हो रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। नई दिल्ली ने वाशिंगटन को स्पष्ट किया है कि एक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, विशेषकर वैश्विक तेल बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के आर्थिक परिणामों को देखते हुए। यह छूट, जो पहली बार मार्च में शुरू की गई थी और बाद में विस्तारित की गई, वर्तमान में 16 मई तक वैध है।

छूट की आवश्यकता और पृष्ठभूमि

मध्य पूर्व में 28 फरवरी को शुरू हुए संकट के लगातार गहराने से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर तनाव पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, में लगातार व्यवधानों ने आपूर्ति की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने मार्च में रूसी तेल के आयात की व्यवस्था को मंजूरी दी थी और बाद में इसे विस्तारित किया था, जिसका उद्देश्य अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति की अनुमति देकर तेल बाजारों को स्थिर करना था। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वाशिंगटन ने भारत से रियायती रूसी तेल की खरीद कम करने का आग्रह किया है, लेकिन भारत का तर्क है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अप्रैल में रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट को बढ़ाया था, जिससे वैश्विक आपूर्ति की कमी के बीच मॉस्को से कच्चे तेल का आयात करने वाले देशों को अस्थायी राहत मिली थी। यह छूट 16 मई को समाप्त होने वाली पिछली छूट का स्थान लेगी जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी।

भारत की ऊर्जा प्राथमिकताएँ और खरीद

भारत ने रूसी कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर जारी रखा है, क्योंकि भारतीय रिफाइनर छूट की समय सीमा से पहले अपनी खरीद में तेजी ला रहे हैं। केप्लर डेटा के अनुसार, मई में अब तक, रूस से भारत का तेल प्रवाह रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँच गया है, जो पहले से लोड किए गए कार्गो के लिए दी गई अनुमति से समर्थित है। केप्लर के पूर्वानुमान बताते हैं कि मासिक प्रवाह अभी भी औसतन लगभग 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन रह सकता है। इस बीच, एक रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने रूस द्वारा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) कार्गो की आपूर्ति की पेशकश को कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। यह निर्णय मध्य पूर्व में तनाव के कारण बढ़ते ऊर्जा दबाव के बावजूद लिया गया है। इस फैसले के परिणामस्वरूप कम से कम एक रूस-लिंक्ड LNG शिपमेंट सिंगापुर के पास फंसा हुआ है, जबकि अनुमत आपूर्तियों पर बातचीत जारी है। भारत ने 30 अप्रैल को रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान अपना रुख साझा किया था, जब उन्होंने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी। सोरोकिन जून में आगे की बातचीत के लिए लौटने की संभावना है।

वैश्विक बाजार पर असर और भारत की स्थिति

भारतीय अधिकारियों ने वाशिंगटन को आगाह किया है कि तेल बाजारों में निरंतर अस्थिरता के व्यापक आर्थिक परिणाम हो सकते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन की आपूर्ति है और किसी भी कमी की सूचना नहीं मिली है। इस सप्ताह की शुरुआत में, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि वैश्विक तनाव के बावजूद ईंधन और रसोई गैस की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। पुरी ने कहा कि भारत के पास वर्तमान में 69 दिनों के लिए पर्याप्त कच्चे तेल और LNG भंडार है, जबकि LPG का स्टॉक 45 दिनों तक चल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये स्तर आपूर्ति में किसी भी तत्काल व्यवधान के जोखिम को दूर करते हैं। उन्होंने कहा, “कोई आपूर्ति समस्या नहीं है, हमारे पास 69 दिनों का कच्चा तेल, LNG स्टॉक और 45 दिनों का LPG स्टॉक है।”

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आगे की राह

16 मई की समय सीमा करीब आने के साथ, अमेरिका के निर्णय पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। यदि छूट नहीं बढ़ाई जाती है, तो भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है या अधिक महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ता कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। रूस के साथ LNG आपूर्ति पर चल रही बातचीत और पावेल सोरोकिन की आगामी जून यात्रा भी भारत की ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कारक होगी। यह स्थिति दर्शाती है कि भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय दबावों और प्रतिबंधों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।