छत्तीसगढ़ में आगामी रविवार को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा, जिसका लक्ष्य 35.98 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर उन्हें इस गंभीर बीमारी से बचाना है। राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस वृहद अभियान के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिसमें शून्य से पांच वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाई जाएंगी। यह अभियान सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश में पोलियो का कोई भी नया मामला सामने न आए और भारत की पोलियो मुक्त स्थिति बनी रहे। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की टीमें घर-घर जाकर और बूथों पर बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का कार्य करेंगी, ताकि कोई भी बच्चा छूटने न पाए।
अभियान का उद्देश्य और लक्ष्य
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का प्राथमिक उद्देश्य भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी हर बच्चे को इस जानलेवा वायरस से बचाना है। भारत को 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पोलियो मुक्त प्रमाणित किया गया था, लेकिन पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो के मामले सामने आने के कारण सतर्कता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अभियान के तहत, स्वास्थ्य विभाग ने 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 35 लाख 98 हजार बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लक्ष्य प्राप्त हो, विशेष रूप से दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अभियान का सफल क्रियान्वयन बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करेगा और प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
तैयारी और व्यवस्थाएं
पल्स पोलियो अभियान के सफल संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। राज्यभर में हजारों पोलियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां अभिभावक अपने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिला सकते हैं। इन बूथों के अलावा, मोबाइल टीमें भी गठित की गई हैं जो रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को खुराक पिलाएंगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी बच्चा छूटने न पाए, अभियान के बाद अगले दो दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों की पहचान की जाएगी और उन्हें पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जाएंगी। इस विशाल कार्य को अंजाम देने के लिए आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी और स्वयंसेवक सहित हजारों लोग प्रशिक्षित किए गए हैं। वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता और कोल्ड चेन प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है ताकि टीके की गुणवत्ता बनी रहे।
जनता से अपील और महत्व
छत्तीसगढ़ सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे आगामी रविवार को अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर ले जाकर पोलियो की खुराक अवश्य पिलवाएं। पोलियो एक गंभीर संक्रामक रोग है जो बच्चों को स्थायी विकलांगता का शिकार बना सकता है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए टीकाकरण ही एकमात्र प्रभावी उपाय है। ‘दो बूंद जिंदगी की’ बच्चों को इस बीमारी से आजीवन सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह अभियान न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे समुदाय को पोलियो के खतरे से बचाने में भी सहायक है। अभिभावकों की भागीदारी और सहयोग ही इस अभियान को सफल बनाने की कुंजी है, और इससे छत्तीसगढ़ को पोलियो मुक्त बनाए रखने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य प्राथमिकताएं
पल्स पोलियो अभियान छत्तीसगढ़ सरकार की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में से एक है, जो राज्य में बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च महत्व देती है। सरकार लगातार बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम चला रही है, जिनमें नियमित टीकाकरण, पोषण अभियान और मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। पोलियो अभियान इसी व्यापक स्वास्थ्य रणनीति का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित बचपन प्रदान करना है। राज्य सरकार का मानना है कि एक स्वस्थ बचपन ही एक स्वस्थ और सशक्त भविष्य की नींव रखता है। इन प्रयासों के माध्यम से, छत्तीसगढ़ न केवल पोलियो मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि समग्र बाल स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार लाने का प्रयास कर रहा है।






