मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अमलीपदर रथयात्रा को छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए इसकी गौरवशाली परंपरा को संरक्षित रखने पर बल दिया।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गरियाबंद जिले के अमलीपदर में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और सामाजिक समरसता की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा वर्षों से लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रही है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने रथयात्रा के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की यह पावन यात्रा समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करती है। इस आयोजन में सभी वर्गों और समुदायों की सहभागिता छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
उन्होंने कहा कि अमलीपदर की रथयात्रा की पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी विशिष्ट परंपराओं और भव्य आयोजन के कारण है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यह आयोजन स्थानीय कला, लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मंदिरों, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक आयोजनों को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से रथयात्रा में श्रद्धा, अनुशासन और स्वच्छता के साथ सहभागिता निभाने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि और विकास का मार्ग निरंतर प्रशस्त होगा तथा छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।




