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खेल

फीफा विश्व कप: ईरान के मैचों को अमेरिका के बजाय मैक्सिको में कराने का विवाद अभी भी अनसुलझा

नई दिल्ली 
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच फीफा और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल राजनीति (डिप्लोमेसी) एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले ने हालात को मुश्किल और जटिल बनाया था। ईरान की फुटबॉल टीम और उसके विश्व कप अभियान पर इसका सीधा असर पड़ा था। इस बीच फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ईरानी फुटबॉल अधिकारियों के बीच तुर्की में हुई बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान की विश्व कप भागीदारी को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे। हालांकि इस मुलाकात में सकारात्मक संकेत मिले, लेकिन एक बड़ा मुद्दा—ईरान के मैचों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में कराने का—अब भी अनसुलझा है। मार्च 2025 के दौरान ईरान की स्थिति काफी अनिश्चित रही। सरकारी स्तर पर यह संकेत दिए गए कि टीम विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकती या उसे अमेरिका जाने में मुश्किल हो सकती है। यहां तक कि फीफा से यह भी मांग उठी कि ईरान के मैचों को किसी अन्य देश, खासकर मेक्सिको, में स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि फीफा ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा और ईरान को अमेरिका में ही अपने मैच खेलने होंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया। ट्रंप ने पूर्व में ईरान को विश्व कप के लिए अहम न होने या फिर टीम के भाग लेने की स्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। हालांकि फीफा लगातार एक स्पष्ट रुख अपनाए हुए है और इन्फेंटिनो ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की टीम को सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी।

ईरान की टीम ने भी मुश्किल हालातों के बीच तैयारी जारी रखी है। जॉर्डन में प्रस्तावित अभ्यास मैचों को सुरक्षा कारणों से तुर्की के अंताल्या में शिफ्ट किया गया, जहां टीम ने नाइजीरिया और कोस्टा रिका के खिलाफ मुकाबले खेले। इन मैचों के दौरान खिलाड़ियों ने युद्ध के विरोध में प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना।

विश्व कप की तैयारियों के तहत ईरान 10 जून तक एरिजोना के टक्सन स्थित ट्रेनिंग कैंप में पहुंचेगा। टीम अपना पहला मैच 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद उसे बेल्जियम और मिस्र जैसी मजबूत टीमों से भी भिड़ना है। हालांकि वीजा से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिससे टीम के कुछ अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिल पाया है।
कुल मिलाकर, यह स्थिति केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, कूटनीति और वैश्विक संबंधों की जटिलताएं भी शामिल हैं। फीफा के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह खेल की निष्पक्षता बनाए रखते हुए सभी टीमों के लिए सुरक्षित और समान माहौल सुनिश्चित करे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की टीम इन चुनौतियों के बीच कैसा प्रदर्शन करती है और क्या फुटबॉल वाकई कूटनीतिक पुल का काम कर पाता है।

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Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.