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बस्तर को मिलेगी विकास की धार, बोधघाट परियोजना पर मुख्यमंत्री साय और जलशक्ति मंत्री पाटिल के बीच अहम चर्चा

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से बोधघाट परियोजना पर चर्चा की। यह परियोजना बस्तर के विकास, सिंचाई, ऊर्जा और जल आपूर्ति में क्रांतिकारी साबित होगी।

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की बहुप्रतीक्षित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना को लेकर आज एक महत्वपूर्ण पहल हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से मुलाकात कर इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व देने और शीघ्र स्वीकृति दिलाने की मांग रखी। बैठक के दौरान परियोजना की उपयोगिता, तकनीकी पक्ष और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने बोधघाट परियोजना को बस्तर के लिए जीवनदायिनी योजना करार देते हुए कहा कि यह सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन – तीनों प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने मंत्री को जानकारी दी कि यह परियोजना बस्तर की लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी और साथ ही 125 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी सुनिश्चित करेगी, जिससे क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी बल मिलेगा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाने की पहल

मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात में यह भी रेखांकित किया कि बस्तर क्षेत्र, जो लंबे समय से नक्सल हिंसा और सामाजिक पिछड़ेपन का शिकार रहा है, अब स्थायित्व और शांति की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि इस क्षेत्र को हिंसा से मुक्त कर आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से समावेशी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हालिया वर्षों में नक्सल गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है और अब विकास कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गया है। ऐसे में बोधघाट परियोजना जैसे मेगा प्रोजेक्ट इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

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राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री पाटिल से आग्रह किया कि बोधघाट परियोजना को “राष्ट्रीय परियोजना” का दर्जा दिया जाए, जिससे इसकी वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया तेज़ हो सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल बस्तर, बल्कि पूरे दक्षिण छत्तीसगढ़ में जल संसाधन और कृषि उत्पादकता को नई दिशा मिलेगी।

तकनीकी परीक्षण और केंद्र की प्रतिक्रिया

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार परियोजना से संबंधित सभी प्रस्तावों का शीघ्र तकनीकी परीक्षण कराएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के सभी पहलुओं का समग्र अध्ययन कर केंद्र सरकार द्वारा यथाशीघ्र निर्णय लिया जाएगा।

बोधघाट परियोजना: क्षेत्रीय परिवर्तन का माध्यम

बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि यह बस्तर क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प का माध्यम बन सकती है। यह परियोजना वर्षो से लंबित रही है और अब जबकि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अनुकूलता बन रही है, इसके शीघ्र क्रियान्वयन की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।

  • सिंचाई क्षेत्र: लगभग 8 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ
  • ऊर्जा उत्पादन: 125 मेगावाट विद्युत क्षमता, जिससे क्षेत्रीय विद्युत आपूर्ति में मजबूती
  • पेयजल सुविधा: ग्रामीण और शहरी बस्तियों को स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति
  • रोजगार: परियोजना के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे
  • स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और जल प्रबंधन में वृद्धि

मुख्यमंत्री ने जताई केंद्र से सहयोग की अपेक्षा

मुख्यमंत्री साय ने बैठक के अंत में आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार के सहयोग से यह परियोजना शीघ्र धरातल पर उतर सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता दे रही है और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। केंद्र से अपेक्षित समर्थन मिलने पर बोधघाट परियोजना से बस्तर को सुनियोजित और स्थायी विकास की राह पर अग्रसर किया जा सकेगा।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल के बीच हुई यह मुलाकात बस्तर क्षेत्र के लिए विकास की नई उम्मीद लेकर आई है। यदि बोधघाट परियोजना को शीघ्र स्वीकृति मिलती है, तो यह न केवल क्षेत्रीय आर्थिक बदलाव का सूत्रधार बनेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के लिए एक राष्ट्रीय जल प्रबंधन मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।

Pradeep Kumar Sahu
लेखक / Author

Pradeep Kumar Sahu is a Senior Journalist at Dabang Awaz, recognized for his fearless reporting and in-depth coverage of political, social, and current affairs across India.

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