‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकास विजन, बस्तर की संस्कृति और सकारात्मक बदलाव को रचनात्मक रूप मिलेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित और सकारात्मक छत्तीसगढ़ के विजन को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने के उद्देश्य से ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर, विकास यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी पहलों को कार्टून एवं व्यंग्य चित्रों के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

कार्यशाला में देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट, युवा कलाकार, कला विद्यार्थी और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागी शामिल होंगे। वे अपने चित्रों के माध्यम से बस्तर की नई पहचान, विकास, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा, जनजातीय जीवन और शासन की सकारात्मक पहलों को अभिव्यक्त करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का मानना है कि कला समाज का सशक्त माध्यम है। कार्टून और रेखाचित्र केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक बदलाव, जनजागरूकता और सकारात्मक संदेश पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘मुस्कुराता बस्तर’ इसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जिसमें कला के माध्यम से बस्तर की नई विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।
कार्यशाला के दौरान कलाकार बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, पर्यटन स्थलों, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और शासन की विभिन्न योजनाओं पर आधारित रचनात्मक चित्र तैयार करेंगे। इन चित्रों के माध्यम से बस्तर की नई पहचान और विकास की कहानी आमजन तक पहुंचेगी।
राज्य सरकार का उद्देश्य बस्तर को केवल प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में ही नहीं, बल्कि विकास, नवाचार और नई संभावनाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी दिशा में कला और संस्कृति को भी विकास के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करती हैं और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं। साथ ही, बस्तर की वास्तविक तस्वीर को रचनात्मक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समावेशी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनभागीदारी के विजन को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।




