बस्तर में पिछले 18 महीनों में 1570 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसे विकास की नई सुबह का संकेत बताया।
रायपुर। मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले 18 महीनों के भीतर कुल 1570 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब “विकास की नई सुबह” की ओर बढ़ रहा है।
सीएम के अनुसार, यह बदलाव राज्य सरकार की ठोस नीति, जनहित में लिए गए फैसलों और सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सेवाएं पहुँच रही हैं और शिक्षा की पहुँच भी लगातार बेहतर हो रही है।
“बस्तर अब खून और बंदूक का नहीं, कलम और विकास का प्रतीक बन रहा है,” – मुख्यमंत्री
आत्मसमर्पण क्यों हैं अहम?
बस्तर लंबे समय से नक्सल हिंसा का केंद्र रहा है, जहां सालों तक सरकारी संस्थाएं सामान्य रूप से काम नहीं कर पाई थीं। ऐसे में नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि स्थानीय जनता अब हिंसा नहीं, बल्कि विकास चाहती है।
राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास योजना के तहत सहायता दी है, जिसमें उन्हें रोजगार, आवास और सुरक्षा प्रदान की जा रही है। यह योजना न केवल हिंसा छोड़ने वालों को नया जीवन देती है, बल्कि अन्य सक्रिय नक्सलियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
सरकार की रणनीति: संवाद और सख्ती दोनों
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है — एक ओर जहाँ विकास कार्यों के ज़रिये जनता को मुख्यधारा में जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षाबलों की तैनाती और लगातार अभियान चलाकर हिंसक गतिविधियों पर लगाम लगाई गई है।
बस्तर में अब नई सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल टावर बन रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं अब ज़मीन पर दिखने लगी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर को पर्यटन, शिक्षा और कृषि के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
जनभागीदारी से बदलाव
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परिवर्तन का श्रेय केवल सरकार या पुलिस को नहीं, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों और युवाओं को भी जाता है, जिन्होंने शांति और विकास का रास्ता चुना।
राज्य सरकार द्वारा चलाए गए “नवा बस्तर” और “लौट चलो अभियान” जैसी पहल ने आत्मसमर्पण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। इन अभियानों के तहत नक्सली क्षेत्रों में जाकर जागरूकता फैलाई गई और भरोसा बहाल करने की कोशिश की गई।
भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार आने वाले महीनों में और भी तेज़ी से बस्तर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर काम करेगी।
“हमारा लक्ष्य है कि बस्तर के हर गाँव तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएँ पहुँचें। शांति के बिना विकास संभव नहीं, और अब बस्तर उस शांति की ओर बढ़ रहा है,” मुख्यमंत्री ने कहा।










