राजस्थान में बहुचर्चित NEET-2026 पेपर लीक मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है, जब भाजपा से जुड़े नेता दिनेश बिंवाल और उनके परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है, क्योंकि दिनेश बिंवाल की भाजपा नेताओं और मंत्रियों के साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। कांग्रेस ने इन तस्वीरों को आधार बनाते हुए सत्ताधारी भाजपा सरकार पर पेपर लीक माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बिंवाल से किसी भी सांगठनिक संबंध से इनकार किया है।
मुख्य गिरफ्तारी और भाजपा से संबंध
14 मई 2026 को राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने NEET-2026 पेपर लीक प्रकरण में जमवारामगढ़ क्षेत्र से भाजपा के युवा मोर्चा से जुड़े दिनेश बिंवाल, उनके भाई मांगीलाल बिंवाल और मांगीलाल के बेटे विकास बिंवाल को गिरफ्तार किया। दिनेश बिंवाल पूर्व में भाजपा युवा मोर्चा, जयपुर देहात के मंत्री रह चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं, जिनमें वे भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के साथ दिखाई दे रहे हैं। कुछ महीने पहले तक जमवारामगढ़ क्षेत्र में बधाई संदेश देते हुए उनके होर्डिंग भी लगे थे, जिनमें स्थानीय विधायक की फोटो भी शामिल थी। हालांकि, पिछले दो-तीन साल से वे ज्यादातर समय सीकर में रहे और पार्टी गतिविधियों से दूर बताए जा रहे थे, लेकिन उनके पूर्व के सांगठनिक पद और नेताओं के साथ तस्वीरें इस मामले को और भी संवेदनशील बना रही हैं।
कांग्रेस के तीखे आरोप
इस गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि यह गंभीर विषय है कि गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल भाजपा का पदाधिकारी रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी वजह से राजस्थान की भाजपा सरकार ने पेपर लीक मामले को छिपाने का प्रयास किया और एफआईआर दर्ज नहीं की? गहलोत ने यह भी कहा कि क्या भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफिया को संरक्षण दे रही है? कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने लगातार हो रहे NEET पेपर लीक (2024, 2025 और अब 2026) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सबूत सामने आने के बावजूद भाजपा सरकार ने एफआईआर दर्ज नहीं की, क्योंकि पेपर लीक के आरोपी स्वयं भाजपा के पदाधिकारी हैं। डोटासरा ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने 9 दिन तक पेपर लीक को छिपाए रखा और एफआईआर दर्ज नहीं की।
भाजपा का बचाव और पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने तत्काल प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिनेश बिंवाल वर्तमान में संगठन में किसी भी पद पर नहीं हैं और न ही उनकी कोई सांगठनिक भागीदारी है। भाजपा नेता मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आरोपों को गलत जानकारी पर आधारित बताया। राठौड़ ने कहा, “वह व्यक्ति हमारा कार्यकर्ता नहीं है। आजकल कोई भी किसी के साथ फोटो या सेल्फी खिंचवा लेता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी को बचाने में नहीं लगी है और जिन लोगों की बात की जा रही है, उन्हें गिरफ्तार भी किया जा चुका है। भाजपा का कहना है कि उनकी सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी दल से जुड़े हों।
नीट पेपर लीक की बढ़ती गंभीरता
NEET परीक्षा, जो देश भर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है, पिछले कुछ वर्षों से लगातार पेपर लीक के आरोपों से घिरी हुई है। यह न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाता है। 2024 और 2025 में भी इसी तरह के सवाल उठे थे और अब 2026 में फिर से ऐसा ही मामला सामने आने से छात्रों और अभिभावकों में भारी निराशा और आक्रोश है। राजस्थान में इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है, जिससे जांच और भी जटिल हो गई है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पेपर लीक माफिया का जाल कितना गहरा है और इसमें राजनीतिक सांठगांठ की संभावनाओं को भी बल मिल रहा है। सरकार और संबंधित एजेंसियों पर यह सुनिश्चित करने का भारी दबाव है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि लाखों छात्रों का विश्वास बहाल हो सके।







