समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। 10 अक्टूबर, 2022 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 82 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद पैतृक गांव सैफई में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए पार्थिव शरीर को देखकर उनकी पोतियां (प्रतीक यादव की बेटियां) फूट-फूटकर रोने लगीं, जिन्हें उनकी मां और मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने संभाला और ढांढस बंधाया। इस हृदय विदारक दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।
अंतिम दर्शन और भावुक क्षण
सैफई के मेला ग्राउंड में रखे गए मुलायम सिंह यादव के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े थे। इस दौरान परिवार के सदस्य और दिग्गज नेता मौजूद थे। जैसे ही नेताजी का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा, उनकी पोतियां अपने दादा के शव को देखकर खुद को रोक नहीं पाईं और बिलख-बिलख कर रोने लगीं। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। प्रतीक यादव की बेटियां अपने दादा से बेहद करीब थीं और उनके निधन का सदमा स्पष्ट रूप से उनके चेहरे पर दिख रहा था। उनकी चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया।
अपर्णा यादव की भूमिका
इस दुखद और भावुक पल में मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने अपनी बेटियों को संभाला। उन्होंने अपनी बेटियों को गले लगाया और उन्हें सांत्वना देते हुए चुप कराने का प्रयास किया। अपर्णा यादव, जो खुद भी गहरे शोक में थीं, ने इस कठिन घड़ी में अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए परिवार को हिम्मत दी। उन्होंने अपनी बेटियों को समझाया कि नेताजी हमेशा उनके साथ रहेंगे और उनकी यादें उनके दिलों में जीवित रहेंगी। यह उनके धैर्य और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक था। अपर्णा यादव, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुई थीं, ने इस मौके पर सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक बहू और मां के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उनकी यह भूमिका परिवार और समर्थकों के लिए प्रेरणादायक रही।
नेताजी को श्रद्धांजलि और जनसैलाब
मुलायम सिंह यादव के अंतिम संस्कार में देश के कोने-कोने से लाखों समर्थक और कई राजनीतिक हस्तियां सैफई पहुंचीं। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित सैफई गांव नेताजी की कर्मभूमि रहा है और यहीं से उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सहित कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसैलाब इतना विशाल था कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो रहा था, लेकिन हर कोई अपने प्रिय नेताजी को अंतिम विदाई देने को आतुर था। उनकी राजनीतिक यात्रा, जो एक पहलवान से शुरू होकर देश के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री तक पहुंची, को सभी ने याद किया और उन्हें एक जमीनी नेता के रूप में सराहा।
परिवार और विरासत
मुलायम सिंह यादव का निधन समाजवादी परिवार और भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने पीछे एक विशाल राजनीतिक विरासत छोड़ी है, जिसे उनके पुत्र अखिलेश यादव आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार के भीतर समय-समय पर उठने वाले मतभेदों के बावजूद, इस दुख की घड़ी में पूरा यादव परिवार एकजुट नजर आया। अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, प्रतीक यादव और अन्य सभी सदस्य अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। नेताजी ने हमेशा सामाजिक न्याय और किसानों-मजदूरों के हितों की बात की थी, और उनकी यह विचारधारा हमेशा उनके समर्थकों को प्रेरित करती रहेगी। उनके जाने से समाजवादी पार्टी के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है कि वे उनकी विरासत को कैसे आगे बढ़ाते हैं और पार्टी को एकजुट रखते हैं। मुलायम सिंह यादव का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और जनसेवा का एक अनुपम उदाहरण रहा, जिसकी यादें हमेशा भारतीय राजनीति में जीवंत रहेंगी।









