बीजापुर के बंदेपारा जंगल में IED विस्फोट के दौरान महिला नक्सली घायल, साथियों ने छोड़ा, पुलिस ने बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
बीजापुर । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर जिले में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ। बंदेपारा जंगल में IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लगाते समय हुए विस्फोट में एक महिला नक्सली गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद उसके साथी नक्सली मौके से भाग निकले, जबकि पुलिस दल ने घायल महिला को खोजकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।
💥 कैसे हुआ हादसा — बम लगाते समय हुआ विस्फोट
जानकारी के अनुसार, यह घटना बीजापुर के बंदेपारा जंगल क्षेत्र में हुई, जो नक्सल गतिविधियों के लिए कुख्यात इलाका है।
महिला नक्सली अपने साथियों के साथ सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए IED लगाने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान तकनीकी गलती से बम में अकस्मात विस्फोट हो गया।
विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के पेड़-पौधे झुलस गए और महिला नक्सली गंभीर रूप से घायल हो गई। विस्फोट की आवाज आसपास के ग्रामीण इलाकों तक सुनी गई।
🚨 साथी नक्सली भागे, घायल को छोड़ दिया जंगल में
प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, विस्फोट होते ही बाकी नक्सली डर के मारे महिला साथी को वहीं छोड़कर जंगल के अंदर भाग गए।
घायल महिला कई घंटों तक जंगल में पड़ी रही।
बाद में गश्त पर निकले जिला पुलिस बल और CRPF की संयुक्त टीम ने उसे देखा और तुरंत उसे सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
बीजापुर एसपी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा—
“बंदेपारा इलाके में नक्सली IED लगा रहे थे, उसी दौरान विस्फोट हुआ। घायल महिला नक्सली को पुलिस ने बचाया और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है।”
🏥 पुलिस ने दिखाई मानवीयता, अस्पताल में भर्ती कराया गया
घायल महिला नक्सली की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने बिना भेदभाव के उसे प्राथमिक उपचार दिलाया और फिर बीजापुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
डॉक्टरों ने बताया कि महिला के हाथ-पैर में गंभीर चोटें हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।
बीजापुर पुलिस का यह कदम मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण पेश करता है। अधिकारियों ने बताया कि घायल महिला से पूछताछ बाद में की जाएगी, फिलहाल उसका इलाज प्राथमिकता है।
🌲 नक्सल गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की बढ़ी नजर
हाल के दिनों में बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में नक्सलियों की गतिविधियां फिर से बढ़ी हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नक्सल संगठन दशहरा सप्ताह के दौरान पुलिस बलों पर हमले की योजना बना रहे थे।
इसलिए सभी जिलों में सर्च ऑपरेशन और नक्सल विरोधी अभियान तेज कर दिया गया है।
बीजापुर क्षेत्र के जंगलों में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान लगातार गश्त पर हैं, ताकि किसी भी तरह की नक्सली गतिविधि को समय रहते नाकाम किया जा सके।
⚙️ IED: नक्सलियों का खतरनाक हथियार
IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस नक्सलियों का सबसे घातक हथियार माना जाता है।
वे जंगलों की पगडंडियों, सड़क किनारे या पुलों के नीचे IED लगाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं।
पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में हुई नक्सली घटनाओं में 60% से अधिक हमले IED से जुड़े रहे हैं।
हालांकि अब सुरक्षा बलों ने एंटी-IED उपकरण और डॉग स्क्वाड की मदद से ऐसे ब्लास्ट को रोकने में काफी सफलता हासिल की है।
🧭 बीजापुर – नक्सलवाद की पुरानी भूमि
बीजापुर जिला लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।
बस्तर संभाग का यह इलाका घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियों और सीमित संचार सुविधाओं के कारण नक्सल गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता रहा है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने लगातार सर्च ऑपरेशन, रोड निर्माण और विकास कार्यों के माध्यम से इन इलाकों में नक्सल प्रभाव को काफी हद तक सीमित किया है।
📉 नक्सलियों का गिरता मनोबल
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हाल के महीनों में लगातार ऑपरेशनों और आत्मसमर्पण नीतियों के कारण नक्सलियों का मनोबल टूटने लगा है।
ऐसी घटनाएँ, जहाँ नक्सली खुद अपने लगाए बम से घायल हो जाएँ, इस बात का संकेत हैं कि उनके संगठन में तकनीकी दक्षता और अनुशासन की कमी बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया कि इस वर्ष अब तक 100 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और कई प्रभावित इलाकों में अब विकास कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं।
🗣️ स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
बंदेपारा के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने कहा कि नक्सली अक्सर रात के समय जंगलों में सक्रिय रहते हैं।
गांव के एक बुजुर्ग ने बताया—
“हम लोग डर में जीते हैं। कभी-कभी रात में धमाके सुनाई देते हैं। पुलिस अब लगातार गश्त कर रही है, जिससे कुछ राहत मिली है।”
सरकार की विकास योजनाओं जैसे सड़क निर्माण, बिजली और शिक्षा परियोजनाओं से भी ग्रामीण इलाकों में नक्सली प्रभाव घटा है।
🕊️ सरकार की नीति — विकास के साथ सुरक्षा
केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति दोहरी है:
- सुरक्षा बलों द्वारा सख्त कार्रवाई
- विकास और विश्वास का माहौल बनाना
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन कर दिया जाएगा।
इस दिशा में बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में रोड कनेक्टिविटी, मोबाइल नेटवर्क और शिक्षा संस्थान तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं।
📜 निष्कर्ष
बीजापुर के बंदेपारा जंगल में हुआ यह IED विस्फोट नक्सलियों की गतिविधियों की खतरनाक हकीकत को उजागर करता है।
घायल महिला नक्सली को पुलिस द्वारा बचाकर अस्पताल पहुंचाना एक मानवीय और पेशेवर दृष्टिकोण का परिचायक है।
यह घटना बताती है कि हिंसा का रास्ता हमेशा विनाश की ओर ले जाता है, जबकि सरकार और सुरक्षा बल अब ऐसे हर प्रयास को नाकाम करने के लिए अधिक संगठित और सतर्क हैं।
बीजापुर और बस्तर अब धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ रहे हैं जहां विकास की रौशनी, हिंसा के अंधेरे को मिटा सकेगी।




