बस्तर के आसना में छत्तीसगढ़ का पहला वन विज्ञान केंद्र खुलेगा। वन अनुसंधान, शिक्षा और रोजगार के लिए बनी सलाहकार समिति करेगी संचालन और मार्गदर्शन।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने राज्य का पहला वन विज्ञान केंद्र (Forest Science Centre) स्थापित करने की घोषणा की है। यह केंद्र जगदलपुर के समीप आसना गांव में खोला जाएगा। इसका उद्देश्य है — वन संरक्षण, अनुसंधान, शिक्षा और स्थानीय समुदायों के सतत विकास को एक ही मंच पर लाना।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसके संचालन और प्रबंधन के लिए एक उच्चस्तरीय सलाहकार समिति गठित की है, जिसमें विषय विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को शामिल किया गया है।
🌿 बस्तर में वन विज्ञान केंद्र की आवश्यकता
बस्तर क्षेत्र देश के सबसे समृद्ध वनों में से एक है, जहां जैव विविधता, औषधीय पौधों और वन उत्पादों की भरपूर संभावनाएं हैं।
इन्हीं संसाधनों के संरक्षण और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यह केंद्र एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस केंद्र में जंगलों से जुड़ी अनुसंधान गतिविधियां, वन प्रबंधन प्रशिक्षण, पारिस्थितिकीय अध्ययन, और जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित होंगे।
साथ ही स्थानीय युवाओं को इको-टूरिज्म, वन उत्पाद मूल्यवर्धन और पर्यावरण शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
वन मंत्री ने कहा —
“बस्तर का यह केंद्र राज्य के वन और पर्यावरणीय अध्ययन का केंद्रबिंदु बनेगा। यह न केवल अनुसंधान को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और ज्ञान का नया अवसर भी लाएगा।”
🧭 केंद्र की प्रमुख विशेषताएं
वन विज्ञान केंद्र का परिसर आधुनिक और पर्यावरण-मित्र ढांचे में विकसित किया जाएगा।
इसमें निम्नलिखित सुविधाएं होंगी —
- वन अनुसंधान प्रयोगशाला: मिट्टी, पौधों और वन्य जीवों पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए।
- प्रशिक्षण हॉल और सेमिनार कक्ष: छात्रों, पर्यावरणविदों और वन अधिकारियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
- औषधीय उद्यान: बस्तर के पारंपरिक वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों का संरक्षण।
- ईको-लाइब्रेरी और इन्फॉर्मेशन सेंटर: वन नीति, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सामग्री।
- इको-टूरिज्म जोन: पर्यटकों और विद्यार्थियों को वन संपदा का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने के लिए।
🏛️ बनी सलाहकार समिति
वन विज्ञान केंद्र के कुशल संचालन के लिए राज्य सरकार ने एक सलाहकार समिति गठित की है।
इस समिति में —
- वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी,
- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पर्यावरण विशेषज्ञ,
- बस्तर संभाग के स्थानीय जनप्रतिनिधि,
- तथा स्वच्छ ऊर्जा एवं जैव विविधता से जुड़े एनजीओ प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति का कार्य होगा —
- केंद्र की गतिविधियों का संचालन और समीक्षा,
- अनुसंधान योजनाओं की स्वीकृति,
- वित्तीय संसाधनों का उपयोग,
- और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना।
🌳 स्थानीय समुदाय की भागीदारी
केंद्र का एक बड़ा उद्देश्य है स्थानीय जनजातीय समुदायों को वन आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ना।
यहां ग्रामीणों को लघु वनोपज के प्रसंस्करण, जैविक खेती, हर्बल उत्पाद निर्माण और वन संरक्षण के वैज्ञानिक तरीकों की प्रशिक्षण दी जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि यह केंद्र “विज्ञान आधारित वन प्रबंधन” के साथ-साथ “लोक आधारित संरक्षण मॉडल” को भी बढ़ावा दे।
इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा बल्कि बस्तर के हजारों परिवारों की आजीविका में स्थायित्व आएगा।
🔬 अनुसंधान और शिक्षा का केंद्र
वन विज्ञान केंद्र में पर्यावरण अध्ययन से जुड़े छात्र और शोधार्थी भी फील्ड रिसर्च कर सकेंगे।
राज्य सरकार ने बताया कि इसे राष्ट्रीय वन अनुसंधान संस्थान (Dehradun) और ICFRE के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि वैज्ञानिक सहयोग बढ़े।
यहां वन पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, मिट्टी संरक्षण, और जैव विविधता प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष अध्ययन किए जाएंगे।
साथ ही राज्य के स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के लिए शैक्षणिक भ्रमण और एक्सपेरिमेंटल प्रोग्राम की सुविधा होगी।
🌱 सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पहल को राज्य के लिए “पर्यावरणीय आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम” बताया।
उन्होंने कहा —
“छत्तीसगढ़ सिर्फ खनिज और कृषि का नहीं, बल्कि हरियाली और जैव विविधता का भी प्रदेश है। यह वन विज्ञान केंद्र हमारी आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी सिखाएगा।”
सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में अंबिकापुर और कांकेर जैसे अन्य जिलों में भी इस मॉडल को दोहराया जाएगा।
🏞️ बस्तर का होगा समग्र विकास
इस परियोजना से बस्तर को वैज्ञानिक, शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय युवाओं के लिए यह रोजगार के नए रास्ते खोलेगा और राज्य के ग्रीन मिशन 2030 को भी गति देगा।
✨ निष्कर्ष
बस्तर के आसना में खुलने वाला राज्य का पहला वन विज्ञान केंद्र न केवल पर्यावरण और अनुसंधान के क्षेत्र में नई दिशा देगा बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगा।
सलाहकार समिति के गठन के साथ यह पहल ज्ञान, संरक्षण और विकास के समन्वय का प्रतीक बनेगी।
यह छत्तीसगढ़ को “हरित भारत” की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी।








