छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक में स्थित कोटिया गांव इन दिनों अभूतपूर्व समस्याओं से जूझ रहा है। गांव की लगभग हर गली पानी और कीचड़ से लबालब भरी हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या तात्कालिक नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। 13 मई 2026 को सामने आई इस खबर ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव की पोल खोल दी है।
समस्या की गंभीरता और दैनिक जीवन पर असर
कोटिया गांव की गलियों में कीचड़ और जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर है कि यह ग्रामीणों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। चाहे बरसात का मौसम हो या सूखा, गांव की सड़कें हमेशा दलदली बनी रहती हैं, जिससे बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को घरेलू कामकाज के लिए बाहर निकलने और बुजुर्गों को आवाजाही में अत्यधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो छोटे बच्चे स्कूल जाते समय या महिलाएं बाजार जाते वक्त फिसलकर गिर जाती हैं, जिससे उन्हें चोटें भी लग जाती हैं। गांव की मुख्य गलियों से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि हर कदम पर कीचड़ में धंसने का डर बना रहता है। इस स्थिति के कारण न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे त्वचा रोग और जलजनित बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ भी प्रभावित हो रही हैं। गांव के व्यापारियों और किसानों को भी अपने उत्पादों को बाजार तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीणों की आपबीती और प्रशासन पर आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि सालों से गांव की पहचान बन चुकी है। उन्होंने इस संबंध में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। गांव की महिलाएं विशेष रूप से आक्रोशित हैं, क्योंकि उन्हें ही सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। एक ग्रामीण महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “हमें रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है, लेकिन इन कीचड़ भरी गलियों से गुजरना किसी सजा से कम नहीं। हमने कई बार शिकायत की, पर कोई सुनने वाला नहीं।” ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए है और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलते हैं। इस अनदेखी ने ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा ली है और उनमें अब निराशा के साथ-साथ रोष भी बढ़ता जा रहा है। वे अब जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाने की उम्मीद कर रहे हैं।
संभावित कारण और समाधान की आवश्यकता
कोटिया गांव में इस जलभराव और कीचड़ की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खराब जल निकासी व्यवस्था, सड़कों का उचित निर्माण न होना और नियमित रखरखाव का अभाव प्रमुख हैं। गांव में पक्की सड़कों और नालियों की कमी के कारण बारिश का पानी और घरों से निकलने वाला गंदा पानी गलियों में जमा हो जाता है, जिससे कीचड़ की स्थिति बद से बदतर हो जाती है। इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रशासन एक समग्र योजना के तहत काम करे। इसमें सबसे पहले गांव की सभी गलियों में उचित जल निकासी प्रणाली का निर्माण और पक्की सड़कों का जाल बिछाना शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, नियमित रूप से साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करना भी आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। स्थानीय निकाय को ग्राम पंचायत के साथ मिलकर इस दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे।
प्रशासन की जिम्मेदारी और आगे की राह
जांजगीर-चांपा जिले के स्थानीय प्रशासन और नवागढ़ ब्लॉक अधिकारियों की यह नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे कोटिया गांव के निवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। ग्रामीणों की नाराजगी और उनकी लगातार मांगों को देखते हुए, अब प्रशासन को गंभीरता से इस समस्या पर ध्यान देना होगा। यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में मूलभूत सुविधाओं के अभाव का एक बड़ा प्रतीक है। यदि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या पर त्वरित प्रतिक्रिया देता है और कोटिया गांव के लोगों को इस कीचड़ भरे जीवन से मुक्ति दिला पाता है या नहीं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज अब सुनी जाएगी और उन्हें एक स्वच्छ और सुगम वातावरण मिलेगा।










