मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुसार विकास गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी विकासात्मक गतिविधियां सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित की जानी चाहिए। उन्होंने वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
जैव विविधता संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता से समृद्ध प्रदेश है, जहां अनेक दुर्लभ वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रणनीति अपनाना जरूरी है, ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
विकास और पर्यावरण का संतुलन
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के दौरान पर्यावरणीय प्रभावों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्राकृतिक आवासों को नुकसान पहुंचाए बिना योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की अवधारणा
मुख्यमंत्री ने मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व पर जोर देते हुए कहा कि जागरूकता और संरक्षण उपायों से ही संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
वन विभाग को दिए निर्देश
उन्होंने अधिकारियों को वन्यजीव निगरानी, संरक्षण परियोजनाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। आधुनिक तकनीक के उपयोग से वन क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
इको-टूरिज्म को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इको-टूरिज्म के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। हालांकि, इसके संचालन में प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।
पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता
उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जागरूक रहें और संरक्षण प्रयासों में सहयोग करें। सरकार पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में काम कर रही है।








