रायपुर में अरुण साव ने किसानों से पशुपालन अपनाकर आय बढ़ाने की अपील की। जैविक खेती, पशुधन विकास और सरकारी योजनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
रायपुर । रायपुर में आयोजित कृषि एवं ग्रामीण विकास संबंधी एक विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के नेता श्री अरुण साव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ और अतिरिक्त आय का विश्वसनीय साधन है। उन्होंने किसानों से अपील की कि पशुधन संरक्षण, डेयरी विकास, कुक्कुट पालन, बकरी पालन और आधुनिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं।
श्री साव ने स्पष्ट कहा कि खेती-बाड़ी के साथ पशुपालन को जोड़कर किसान साल भर स्थायी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। यह न केवल कृषि जोखिम को कम करता है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिरता को भी मजबूत बनाता है।
🐄 पशुपालन भविष्य का महत्वपूर्ण निवेश
अपने संबोधन में श्री अरुण साव ने बताया कि—
- दूध उत्पादन,
- दही, घी, पनीर जैसे दुग्ध उत्पाद,
- अंडा और मांस उद्योग,
- पशु आधारित जैविक खाद
आज ग्रामीण आजीविका के सबसे भरोसेमंद क्षेत्रों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और योजनाओं के साथ पशुपालन एक लाभकारी उद्यम के रूप में तेजी से उभर रहा है।
🌱 कृषि और पशुपालन—दोनों का समन्वय बढ़ाएगा आय
उन्होंने समझाया कि पशुपालन कृषि के साथ जुड़कर किसानों को कई फायदे देता है—
- गोबर और अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार कर खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ती है।
- पशुओं से प्राप्त खाद रासायनिक उर्वरकों की जगह ले रही है।
- वर्षभर आय का स्रोत बनता है।
- दूध, अंडे, मीट और चारे की निरंतर मांग रहती है।
इससे किसानों को मौसम आधारित अनिश्चितताओं का सामना कम करना पड़ता है।
🧪 जैविक खेती और पशुपालन—एक-दूसरे के पूरक
श्री साव ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैविक खाद, गोमूत्र आधारित उत्पाद, पंचगव्य और प्राकृतिक कृषि के कई प्रयोग पशुपालन पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि आज उपभोक्ता भी जैविक उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे में किसानों के लिए यह सुनहरा अवसर है।
🚜 सरकारी योजनाओं पर भी दी जानकारी
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग की योजनाओं की भी जानकारी दी गई—
- पशुधन विकास कार्यक्रम
- दुग्ध उत्पादन प्रोत्साहन
- पशु टीकाकरण अभियान
- बकरा-बकरी विकास योजना
- कुक्कुट पालन सहायता योजनाएँ
- चारे की उपलब्धता बढ़ाने की पहल
अधिकारियों ने बताया कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कम ब्याज पर ऋण, अनुदान और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है।
🐓 कुक्कुट और बकरी पालन पर जोर
श्री साव ने कुक्कुट पालन और बकरी पालन को ग्रामीण रोजगार का बड़ा माध्यम बताया।
उनके अनुसार—
- कम लागत में शुरू
- तेजी से रिटर्न
- मार्केट की निरंतर मांग
- महिलाओं की भागीदारी अधिक
इन कारणों से यह ग्रामीण परिवारों के लिए सबसे बेहतर विकल्प बनते जा रहे हैं।
👩🌾 महिलाओं के लिए पशुपालन—आत्मनिर्भरता का मार्ग
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूह पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
दूध बिक्री, पोल्ट्री, मुर्गी पालन और सूक्ष्म उद्यमों से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
साव ने कहा कि सरकार द्वारा समूहों को विशेष प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जा रही है।
🧬 पशु स्वास्थ्य और समय पर टीकाकरण आवश्यक
श्री अरुण साव ने किसानों को पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि—
- नियमित टीकाकरण
- पौष्टिक आहार
- समय पर इलाज
- उचित शेड प्रबंधन
पशुओं की उत्पादन क्षमता के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पशुपालन तभी लाभदायक है जब पशुओं का स्वास्थ्य अच्छा हो।
🌟 जनता और किसानों ने दी सकारात्मक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों ने कहा कि इससे उन्हें पशुपालन से जुड़े नए तकनीकी और व्यावहारिक सुझाव मिले, जिन्हें अपनाकर वे अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
✨ समग्र रूप से—पशुपालन बना किसानों की आय का स्थायी साधन
श्री अरुण साव के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन की भूमिका निर्णायक है।
खेती के साथ पशुपालन जोड़कर किसान आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं।








