LIVE बुधवार, 13 मई 2026
Advertisement Vastu Guruji
छत्तीसगढ़

रेलवे स्टेशन पर गूंजा ‘अरपा पैरी के धार’, यात्रियों के चेहरों पर मुस्कान — छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मधुर गूंज से महका माहौल


रायपुर रेलवे स्टेशन पर ‘अरपा पैरी के धार’ गीत गूंजा तो यात्रियों के चेहरे खिल उठे। छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत ने माहौल को संस्कृति से भर दिया।

रायपुर । रायपुर रेलवे स्टेशन पर उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला जब छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकगीत ‘अरपा पैरी के धार’ स्टेशन परिसर में गूंज उठा।
प्लेटफार्म पर जैसे ही यह मधुर गीत बजना शुरू हुआ, यात्रियों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी और माहौल छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मिठास से भर गया।

यह पहल भारतीय रेलवे की “स्टेशन पर संस्कृति” अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को स्थानीय परंपराओं और लोककला से जोड़ना है।


🎵 स्टेशन पर गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकगीत

‘अरपा पैरी के धार, मइया ओ मइया…’ जैसे ही स्टेशन के स्पीकरों से बजने लगा, यात्रियों ने अपने मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
कई यात्रियों ने इस गीत की धुन पर झूमते हुए कहा कि यह पहल घर की याद और अपनापन का एहसास कराती है।

एक यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा,

विज्ञापन
Advertisement

“रेलवे स्टेशन पर छत्तीसगढ़ी गीत सुनना बहुत सुखद अनुभव है। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़ाव की भावना है।”


🏞️ छत्तीसगढ़ की पहचान बना ‘अरपा पैरी के धार’

यह गीत छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है।
‘अरपा’ और ‘पैरी’ राज्य की दो प्रमुख नदियाँ हैं — जो प्रदेश के जीवन और संस्कृति का आधार हैं।
गीत के बोल छत्तीसगढ़ की धरती की सौंधी खुशबू, माँ के स्नेह और गाँव की सहजता को दर्शाते हैं।

गीतकार संतोष नागदेव और गायक अनूप बारले की आवाज़ में यह गीत राज्य के हर नागरिक के दिल में बस चुका है।
इसी भावना को रेलवे ने यात्रियों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।


🚉 रेलवे की पहल — संस्कृति को मंच

भारतीय रेलवे ने देशभर में स्थानीय संस्कृति और लोककला को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।
इस अभियान के तहत प्रमुख स्टेशनों पर स्थानीय भाषाओं में गीत, लोकसंगीत और पारंपरिक घोषणाएँ की जा रही हैं।

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और जगदलपुर स्टेशनों पर छत्तीसगढ़ी गीतों का चयन किया गया है ताकि यात्रियों को यात्रा के साथ संस्कृति का अनुभव भी हो।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह पहल “Vocal for Local Culture” की भावना को भी सशक्त करती है।


🌸 यात्रियों में उमड़ा उत्साह

जैसे ही गीत बजा, यात्रियों ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।
#ArpaPairiKeDhar और #ChhattisgarhCulture जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

स्टेशन पर मौजूद कई यात्रियों ने कहा कि यह पहल न केवल मनोरंजन बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनी है।

“जब अपने राज्य की भाषा और संगीत स्टेशन पर सुनाई देता है, तो लगता है जैसे घर लौट आए हों।”


🧑‍🎤 लोक कलाकारों में खुशी

छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों और संगीतकारों ने इस कदम की सराहना की है।
लोकगायक दिलेश साहू ने कहा —

“रेलवे ने जो किया है, वह छत्तीसगढ़ की आत्मा को आमजन तक पहुँचाने का प्रयास है। लोकगीत केवल गीत नहीं, बल्कि हमारी परंपरा की जीवंत कहानी हैं।”

उन्होंने सुझाव दिया कि आगे चलकर रेलवे स्टेशनों पर लाइव लोकसंगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे यात्री स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस कर सकें।


🌿 संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें न केवल संस्कृति को जीवित रखती हैं बल्कि पर्यटन और स्थानीय पहचान को भी सशक्त बनाती हैं।
छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में पर्यटन, हस्तकला और लोककला के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है।

रेलवे विभाग ने बताया कि सांस्कृतिक घोषणाएँ और गीत यात्रियों की यात्रा को यादगार बनाते हैं और राज्य के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता भी बढ़ाते हैं।


🌏 यात्रियों का भावनात्मक जुड़ाव

कई प्रवासी यात्रियों ने कहा कि जब वे लंबे समय बाद छत्तीसगढ़ लौटते हैं और स्टेशन पर ‘अरपा पैरी के धार’ बजता है, तो उन्हें बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं।
यह गीत उन्हें परिवार, गाँव और मातृभूमि की याद दिलाता है।

“यह सिर्फ़ संगीत नहीं, भावनाओं की गूंज है,” एक यात्री ने कहा।


🏛️ रेलवे प्रशासन का बयान

रायपुर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि “हर स्टेशन अपनी पहचान” कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय भाषाओं और गीतों को स्टेशन की ध्वनि पहचान (sound identity) बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा,

“हम चाहते हैं कि जब कोई यात्री रायपुर पहुंचे, तो उसे गीतों से पता चले कि वह छत्तीसगढ़ की धरती पर आया है।”

इसके साथ ही स्टेशन पर लोककला, बस्तर की मूर्तिकला और छत्तीसगढ़ी चित्रकला के प्रदर्शन की भी योजना है।


🌼 निष्कर्ष

‘अरपा पैरी के धार’ गीत का रेलवे स्टेशन पर बजना केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं की पुनर्स्थापना है।
यह पहल दिखाती है कि आधुनिकता के बीच भी अपनी मिट्टी, भाषा और लोकसंगीत का सम्मान जीवित रखा जा सकता है।

रेलवे का यह प्रयास न केवल यात्रियों को आनंदित कर रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.