पं. धीरेंद्र शास्त्री ने रायपुर में दिव्य दरबार की घोषणा की। कहा—“I love Muhammad ठीक है, पर I love Mahadev भी स्वीकारो, छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”
रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर धार्मिक माहौल से गूंजने वाली है। बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जल्द ही यहां ‘दिव्य दरबार’ लगाने जा रहे हैं। कार्यक्रम की घोषणा होते ही प्रदेशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर है। इस दौरान शास्त्री ने एक बयान दिया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया —
“I love Muhammad कहना बुरा नहीं, लेकिन अगर कोई ‘I love Mahadev’ कहे तो उसमें भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अगर छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”
🔶 रायपुर में दिव्य दरबार की तैयारी जोरों पर
बागेश्वर धाम सरकार के भक्तों के अनुसार, रायपुर में होने वाला यह दिव्य दरबार अक्टूबर के मध्य में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। आयोजन स्थल की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंच सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन भी सक्रिय है।
शास्त्री के अनुयायियों का कहना है कि यह आयोजन ‘सामाजिक एकता, धर्म और अध्यात्म के समन्वय’ का प्रतीक होगा।
🕉️ ‘I love Muhammad’ बनाम ‘I love Mahadev’ – बयान पर मचा संग्राम
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि किसी धर्म या व्यक्ति के प्रति प्रेम जताना गलत नहीं, लेकिन हिंदू आस्था का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा—
“अगर कोई ‘I love Muhammad’ लिखता है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन जब कोई ‘I love Mahadev’ कहे और उसे निशाना बनाया जाए, तो ये सहन नहीं किया जाएगा। धर्म के नाम पर एकतरफा सहिष्णुता अब नहीं चलेगी।”
यह बयान सुनते ही सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार जयकारे लगाए—
“जय श्री राम!” और “हर हर महादेव!”
🗣️ ‘छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा’ – आस्था की दृढ़ता का संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ कहा कि भारत की संस्कृति सहिष्णु है, लेकिन उसकी सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए।
“हम किसी का अपमान नहीं चाहते, लेकिन जो हमारे आराध्य का अपमान करेगा, उसे मौन नहीं रहने दिया जाएगा। भारत सभी धर्मों का सम्मान करता है, पर अब हिंदू समाज भी जाग चुका है।”
उनका यह वक्तव्य सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में है। समर्थक इसे “हिंदू गौरव की आवाज” बता रहे हैं, जबकि कुछ विरोधी इसे विवादित करार दे रहे हैं।
🪔 आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश का समागम
बागेश्वर बाबा का यह दरबार सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक संवाद का मंच भी माना जा रहा है। आयोजक समिति के सदस्यों के अनुसार, कार्यक्रम में भक्ति कथा, ध्यान सत्र, और जनकल्याण योजनाओं पर चर्चा भी की जाएगी।
शास्त्री ने कहा—
“धर्म हमें जोड़ता है, तोड़ता नहीं। मेरा प्रयास है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई — सब एक साथ मिलकर भारत की संस्कृति को मजबूत करें।”
🏛️ रायपुर प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
आयोजन में बड़ी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। रायपुर पुलिस ने कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात योजना तैयार की है।
- लगभग 500 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।
- श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वयंसेवी संगठनों द्वारा की जा रही है।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल कैंप भी लगाया जाएगा।
🙏 श्रद्धालुओं में उत्साह, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
बागेश्वर धाम सरकार के प्रवचन और चमत्कारिक कथाओं की लोकप्रियता पहले से ही देशभर में फैल चुकी है। रायपुर में उनके आगमन की खबर मिलते ही हजारों लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘हर हर महादेव’ ट्रेंड शुरू कर दिया है।
कई भक्तों ने लिखा –
“बागेश्वर बाबा जहां जाते हैं, वहां माहौल बदल जाता है। रायपुर में एक नई ऊर्जा महसूस होगी।”
🕉️ धर्म और सहिष्णुता पर संतुलित दृष्टिकोण
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत का धर्म तर्क, प्रेम और सह-अस्तित्व पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘सबका कल्याण’ (सर्वे भवन्तु सुखिनः) का संदेश देता है।
“हमारे ग्रंथ कहते हैं—सत्य, अहिंसा और श्रद्धा से बड़ा कोई धर्म नहीं। इसलिए किसी के प्रति नफरत नहीं, पर आत्म-सम्मान पर समझौता भी नहीं।”
📿 बागेश्वर धाम का बढ़ता प्रभाव
बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री हाल के वर्षों में देशभर में धार्मिक आयोजनों के केंद्र बने हैं। उनकी कथाओं में ‘संस्कार, राष्ट्रभक्ति और आत्मविश्वास’ का गहरा संदेश होता है।
रायपुर का यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी राज्यों के भक्तों को भी आकर्षित कर रहा है। माना जा रहा है कि यह आयोजन राजधानी में अब तक का सबसे बड़ा आध्यात्मिक सम्मेलन साबित हो सकता है।
🌟 ‘भारत की आत्मा धर्म है’ – पं. शास्त्री का संदेश
शास्त्री ने अंत में कहा—
“भारत की आत्मा धर्म है। जो धर्म का अपमान करेगा, वो स्वयं ही मिट जाएगा। हमारा मार्ग प्रेम का है, पर कमजोरों जैसा नहीं। हर किसी को अपने आराध्य पर गर्व करने का अधिकार है।”
📣 निष्कर्ष (सारांश)
पं. धीरेंद्र शास्त्री का रायपुर दौरा धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका संदेश स्पष्ट है—भारत सभी धर्मों का सम्मान करता है, लेकिन हिंदू आस्था के अपमान पर अब मौन नहीं रहेगा।
रायपुर का यह दिव्य दरबार न केवल आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि धर्म, संवाद और सम्मान के नए अध्याय की शुरुआत भी करेगा।






