भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2026 की यह शुभ शुरुआत छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को नई पहचान देगी।
कवर्धा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान देने का माध्यम बनेगी। कवर्धा जिले स्थित प्राचीन भोरमदेव मंदिर परिसर से जुड़े पर्यटन विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से धार्मिक और हेरिटेज टूरिज्म को नई गति मिलेगी।
भोरमदेव मंदिर अपनी अद्वितीय शिल्पकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहलाता है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। सरकार ने पर्यटन सुविधाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए कॉरिडोर परियोजना को विशेष प्राथमिकता दी है।
कॉरिडोर में विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के तहत पार्किंग, वॉकवे, लैंडस्केपिंग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, सूचना केंद्र, बैठक स्थल और सुरक्षा व्यवस्था को अत्याधुनिक रूप दिया जाएगा। साथ ही मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक गरिमा को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विकास से स्थानीय युवाओं के लिए होटल, गाइड, परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण आजीविका में सुधार होगा।
धरोहर संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्य पुरातत्व विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के परामर्श से किए जाएंगे, ताकि धरोहर संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बना रहे। परियोजना का उद्देश्य परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करना है।
नागरिकों में उत्साह
भूमिपूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन, संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। लोगों ने उम्मीद जताई कि भोरमदेव कॉरिडोर राज्य के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण आकर्षण केंद्र बनेगा।
इस परियोजना के साथ वर्ष 2026 का आगाज़ विकास, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक गौरव की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।










