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दिल्ली HC का बड़ा निर्णय: सह-दोषी के फरलो पर भी दूसरे को रिहाई मुमकिन

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि एक सह-दोषी के फरलो (अल्पकालिक छुट्टी) पर रहते हुए भी दूसरे सह-दोषी को जेल से रिहा होने से नहीं रोका जा सकता। यह निर्णय कैदियों के मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धांतों को मजबूत करता है, और जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि प्रत्येक कैदी के आवेदन पर उसके अपने गुणों के आधार पर विचार किया जाए, न कि अन्य सह-दोषियों की स्थिति के आधार पर। यह फैसला उन कैदियों के लिए एक बड़ी राहत है जो अक्सर अपने सह-दोषियों की प्रशासनिक स्थिति के कारण अपनी रिहाई या फरलो में देरी का सामना करते हैं।

हाई कोर्ट का अहम फैसला

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि किसी एक सह-दोषी का फरलो पर होना, किसी दूसरे सह-दोषी को उसकी पात्रता के बावजूद रिहाई या पैरोल से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकता। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक कैदी को भारत के संविधान के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है, और उनकी रिहाई के आवेदनों का मूल्यांकन स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए। यह फैसला उन प्रशासनिक प्रथाओं को चुनौती देता है जहां जेल अधिकारी अक्सर सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए एक ही अपराध के कई दोषियों की एक साथ रिहाई या फरलो देने से बचते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि एक कैदी फरलो या रिहाई के लिए सभी निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है, तो उसे केवल इसलिए रोका नहीं जा सकता क्योंकि उसका कोई सह-दोषी पहले से ही अस्थायी रिहाई पर है।

फैसले का महत्व और कानूनी आधार

इस फैसले का महत्व दूरगामी है, क्योंकि यह कैदियों के अधिकारों को जेल मैनुअल और संविधान के दायरे में और अधिक स्पष्टता प्रदान करता है। न्यायालय ने रेखांकित किया कि फरलो या रिहाई एक कैदी का अधिकार है, बशर्ते वह निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो, और इसे मनमाने ढंग से अस्वीकार नहीं किया जा सकता। यह निर्णय कैदियों के मानवाधिकारों और न्याय तक उनकी पहुंच को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने अपने तर्क में कहा कि प्रत्येक कैदी को एक व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए और उसके मामले का मूल्यांकन व्यक्तिगत रूप से किया जाना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति की स्थिति के आधार पर उसके अधिकार को बाधित करना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा। यह फैसला यह भी सुनिश्चित करता है कि जेल प्रशासन को कैदियों के आवेदनों पर अधिक वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष तरीके से विचार करना होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी कम होगी।

कैदियों के अधिकार और फरलो नियम

फरलो एक कैदी को दी जाने वाली अल्पकालिक, नियमित छुट्टी होती है, जिसका उद्देश्य कैदी को समाज से जोड़े रखना और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देना होता है। यह अच्छे आचरण और निश्चित शर्तों के अधीन दी जाती है, और इसे कैदी के पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पैरोल के विपरीत, जो आमतौर पर विशेष परिस्थितियों (जैसे परिवार में मृत्यु या बीमारी) में दी जाती है और अधिक गंभीर मामलों में विचारणीय होती है, फरलो एक कैदी का अधिकार है यदि वह पात्रता मानदंडों को पूरा करता है। दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला इन अधिकारों को और अधिक मजबूत करता है। इसने यह सुनिश्चित किया है कि कैदियों को उनके कानूनी अधिकारों से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि अन्य सह-दोषी पहले से ही अस्थायी रिहाई पर हैं। यह जेल प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उन्हें कैदियों के व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करना होगा और प्रत्येक आवेदन पर गंभीरता से विचार करना होगा।

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आगे क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भविष्य में इसी तरह के मामलों में एक मिसाल के तौर पर काम करेगा। इससे जेल प्रशासन को कैदियों की रिहाई और फरलो आवेदनों पर अधिक निष्पक्षता से विचार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह उम्मीद की जाती है कि इस निर्णय से उन कैदियों को राहत मिलेगी जिनके फरलो या रिहाई के आवेदन केवल सह-दोषियों की स्थिति के कारण लंबित पड़े थे। यह फैसला जेल सुधारों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है और कैदियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भविष्य में जेल नियमों और नीतियों की समीक्षा को भी प्रेरित कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संवैधानिक सिद्धांतों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों के अनुरूप हों। कुल मिलाकर, यह निर्णय कैदियों के लिए न्याय और पुनर्वास के अवसरों को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

Heshma lahre
लेखक / Author

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.

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