LIVE बुधवार, 13 मई 2026
Advertisement Vastu Guruji
दिल्ली

केंद्र का FY27 तक राजमार्ग विस्तार धीमा करने का लक्ष्य, BOT मॉडल पर जोर

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 तक देश में राजमार्ग निर्माण की गति को धीमा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह निर्णय मुख्य रूप से अटकी हुई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और बुनियादी ढांचा विकास में निजी निवेश को फिर से बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस नई रणनीति के तहत, सरकार बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दे रही है, ताकि सड़क निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके। यह कदम देश के राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार में एक अधिक संतुलित और टिकाऊ दृष्टिकोण का संकेत देता है।

गति धीमी करने का कारण और लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए राजमार्ग निर्माण के लक्ष्य को पहले की तुलना में अधिक संयमित रखने का निर्णय लिया है। पिछले कुछ वर्षों से राजमार्ग निर्माण में आक्रामक लक्ष्य निर्धारित किए जाते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई परियोजनाएं विभिन्न कारणों से अधूरी रह गई हैं या उनकी प्रगति धीमी हो गई है। अब सरकार का प्राथमिक ध्यान इन विलंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर है। इस कदम का उद्देश्य केवल किलोमीटर में वृद्धि दर्ज करने के बजाय, मौजूदा नेटवर्क की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, वे समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी हों, जिससे जनता को उनका लाभ जल्द मिल सके।

सरकार का मानना है कि केवल नए निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने से न केवल संसाधन बचेंगे, बल्कि इससे भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार होगा। यह रणनीति यह भी सुनिश्चित करेगी कि निवेश का सही उपयोग हो और देश में एक सुदृढ़ और निर्बाध सड़क नेटवर्क स्थापित हो सके। इस बदलाव से परियोजना प्रबंधन में अधिक अनुशासन और जवाबदेही आने की उम्मीद है।

BOT मॉडल की वापसी और निजी निवेश

राजमार्ग निर्माण में निजी निवेश को फिर से आकर्षित करने के लिए, केंद्र सरकार बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल को पुनर्जीवित कर रही है। BOT एक ऐसा मॉडल है जिसमें निजी डेवलपर्स सड़क का निर्माण करते हैं, एक निश्चित अवधि के लिए उसका संचालन करते हैं (टोल संग्रह के माध्यम से), और फिर इसे सरकार को हस्तांतरित कर देते हैं। यह मॉडल सरकार पर शुरुआती वित्तीय बोझ को कम करता है और निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ उठाता है। पिछले कुछ वर्षों में, BOT मॉडल ने कई चुनौतियों का सामना किया था, जैसे भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, यातायात अनुमानों में त्रुटियां और वित्तीय जोखिम, जिसके कारण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) जैसे अन्य मॉडल अधिक प्रचलित हो गए थे।

विज्ञापन
Advertisement

अब, सरकार BOT मॉडल को अधिक आकर्षक बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार कर रही है, जिसमें जोखिम साझाकरण तंत्र को बेहतर बनाना और निवेशकों को अधिक विश्वास दिलाना शामिल है। इस मॉडल की वापसी से उम्मीद है कि निजी क्षेत्र, विशेषकर बड़े कॉर्पोरेट्स, एक बार फिर राजमार्ग परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी और सरकार के वित्तीय संसाधनों पर निर्भरता कम होगी।

अटकी परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित

सरकार की नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू अटकी हुई राजमार्ग परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करना है। देश भर में ऐसी कई परियोजनाएं हैं जो भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरियों, वित्तीय बाधाओं या ठेकेदारों की समस्याओं के कारण वर्षों से लंबित पड़ी हैं। इन परियोजनाओं के विलंब से न केवल लागत में वृद्धि होती है, बल्कि यह आर्थिक विकास को भी बाधित करती हैं और जनता को असुविधा होती है।

केंद्र सरकार अब इन परियोजनाओं की पहचान कर रही है और उनके समापन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसमें संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, लंबित मंजूरियों को तेजी से निपटाना और आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। यह कदम सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह केवल नई घोषणाएं करने के बजाय, मौजूदा संसाधनों का अधिकतम उपयोग करके ठोस परिणाम देना चाहती है। इन परियोजनाओं को पूरा करने से मौजूदा सड़क नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि होगी और यातायात सुगम होगा।

आगे की राह और चुनौतियां

केंद्र सरकार का यह नया दृष्टिकोण, जिसमें राजमार्ग विस्तार की गति को धीमा करना और BOT मॉडल के माध्यम से निजी निवेश पर जोर देना शामिल है, देश के बुनियादी ढांचा विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। इस रणनीति से दीर्घकालिक स्थिरता और परियोजना की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, BOT मॉडल को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित करना और निजी निवेशकों का विश्वास फिर से जीतना एक चुनौती भरा कार्य होगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जोखिम उचित रूप से साझा किए जाएं और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक अनुकूल कारोबारी माहौल हो।

इसके अतिरिक्त, अटकी हुई परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए मजबूत निगरानी और कार्यान्वयन तंत्र की आवश्यकता होगी। यदि इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया जाता है, तो यह नई रणनीति भारत के राजमार्ग नेटवर्क को मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह दृष्टिकोण एक अधिक संतुलित, वित्तीय रूप से टिकाऊ और गुणवत्ता-केंद्रित बुनियादी ढांचा विकास मॉडल की दिशा में एक कदम है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.