रायपुर के शासकीय फार्म में नील-हरित काई उत्पादन शुरू हुआ, जिससे किसानों को जैविक उर्वरक का विकल्प मिलेगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर स्थित शासकीय फार्म में नील-हरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उत्पादन की शुरुआत की गई है। यह पहल किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नील-हरित काई एक प्रकार का जैव उर्वरक है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है। इसके उपयोग से फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
नील-हरित काई के उत्पादन की शुरुआत से किसानों को जैविक खेती के लिए एक प्रभावी विकल्प मिलेगा। यह काई प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण का कार्य करती है, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो सकती है, जिससे खेती की लागत भी घटेगी।
किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
शासकीय फार्म में नील-हरित काई उत्पादन के साथ-साथ किसानों को इसके उपयोग और उत्पादन की तकनीक के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कृषि विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान इस तकनीक को अपनाएं और जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ें।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को बताया जाएगा कि नील-हरित काई का उत्पादन कैसे किया जाता है और इसे खेतों में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
मिट्टी की उर्वरता में होगा सुधार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नील-हरित काई मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उनकी वृद्धि बेहतर होती है।
इसके उपयोग से मिट्टी की संरचना भी सुधरती है और लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता बनी रहती है।
पर्यावरण के लिए भी लाभकारी
नील-हरित काई का उपयोग पर्यावरण के लिए भी लाभकारी माना जाता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि जैविक उर्वरकों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने से टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल
कृषि विभाग का मानना है कि नील-हरित काई उत्पादन और इसके उपयोग से किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है।
इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि कृषि क्षेत्र में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल पद्धतियों को बढ़ावा मिल सके।
इस प्रकार रायपुर के शासकीय फार्म में नील-हरित काई उत्पादन की शुरुआत कृषि क्षेत्र में नवाचार और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।






