BSP ने बढ़ती लागत के कारण दल्ली राजहरा से रावघाट खदान की ओर फोकस बढ़ाया, जिससे उत्पादन लागत कम करने और संसाधन उपयोग बेहतर होगा।
रायपुर। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में आयरन ओर उत्खनन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दल्ली राजहरा खदानों में बढ़ती लागत के चलते अब फोकस धीरे-धीरे रावघाट खदान की ओर शिफ्ट किया जा रहा है। यह कदम उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, दल्ली राजहरा खदानों में लंबे समय से खनन कार्य चल रहा है, जिसके कारण यहां से आयरन ओर निकालना अब अधिक महंगा और चुनौतीपूर्ण हो गया है। गहराई बढ़ने के साथ लागत और तकनीकी कठिनाइयों में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में रावघाट खदान को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
रावघाट क्षेत्र में आयरन ओर के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं और यहां खनन की संभावनाएं भी बेहतर मानी जा रही हैं। इस क्षेत्र के विकास के लिए रेलवे लाइन और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले ही शुरू किया जा चुका है, जिससे परिवहन और आपूर्ति में सुविधा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रावघाट की ओर फोकस बढ़ाने से BSP की उत्पादन क्षमता को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे स्टील उत्पादन की निरंतरता बनी रहेगी और लागत नियंत्रण में भी सुधार होगा।
हालांकि, इस बदलाव से दल्ली राजहरा क्षेत्र के श्रमिकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में संबंधित विभागों द्वारा पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रबंधन का कहना है कि यह बदलाव दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे उत्पादन को टिकाऊ और लागत प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही, पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षा मानकों का भी ध्यान रखा जा रहा है।
यह परिवर्तन छत्तीसगढ़ के खनन और इस्पात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम है।








