महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बुधवार सुबह ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पार्षद मतीन पटेल के घर और कार्यालय को नगर निगम ने बुलडोजर से ढहा दिया। यह कार्रवाई अवैध निर्माण के आरोपों के तहत की गई, लेकिन इसके पीछे नासिक TCS केस की मुख्य आरोपी निदा खान को मतीन पटेल द्वारा कथित तौर पर पनाह देने का गंभीर आरोप भी जुड़ा है। इस घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे मामले की संवेदनशीलता बढ़ गई है।
नासिक TCS केस: यौन शोषण और धार्मिक दबाव के आरोप
यह पूरा मामला नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) के कार्यालय से जुड़े एक बड़े विवाद से शुरू हुआ, जिसमें महिलाओं ने यौन शोषण और धार्मिक दबाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस संबंध में नौ छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामलों की जांच कर रही है। पहली FIR 26 मार्च को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, जिसके बाद आठ और महिलाओं ने शिकायतें दर्ज कराईं। इन बयानों से यौन शोषण, जोर-जबरदस्ती और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का एक गंभीर पैटर्न सामने आया है।
FIR के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि उसने व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए कर्मचारियों को नमाज पढ़ने और मांसाहारी भोजन करने के लिए दबाव डाला। साथ ही, महिलाओं को इस्लामिक परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने और व्यवहार करने की सलाह भी दी गई थी। एक पीड़ित महिला ने अपनी FIR में बताया कि जून 2025 से मार्च 2026 तक वह TCS ऑफिस में एसोसिएट थी और उसके सीनियर रजा मेमन उससे निजी जीवन, जैसे हनीमून और पति के साथ संबंधों के बारे में आपत्तिजनक सवाल पूछते थे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) ने इस मामले पर पिछले महीने एक बयान में अपनी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति दोहराते हुए किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
मतीन पटेल पर निदा खान को पनाह देने का आरोप और बुलडोजर कार्रवाई

नासिक TCS केस की आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका 2 मई को अदालत ने खारिज कर दी थी, बावजूद इसके कि उसने अपनी गर्भावस्था का हवाला दिया था। इसके बाद, निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के समय निदा खान को AIMIM पार्षद मतीन पटेल ने अपने घर में पनाह दी हुई थी। इस खुलासे के बाद ही मतीन पटेल पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी।
9 मई को छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम ने मतीन पटेल को उनके घर और कार्यालय में अवैध निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें 72 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया था। जवाब न मिलने और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, नगर निगम ने बुधवार सुबह मतीन पटेल के घर और कार्यालय पर बुलडोजर चलाकर अवैध ढांचों को ढहा दिया। यह कार्रवाई सीधे तौर पर अवैध निर्माण से जुड़ी थी, लेकिन इसका संबंध निदा खान को पनाह देने के आरोप से भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जिसने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस बुलडोजर कार्रवाई पर महाराष्ट्र की राजनीति से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ मतीन पटेल और उनके समर्थक घर को अपना नहीं बता रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वे निगम के नोटिस के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कर रहे थे। उन्होंने इसे “डबल स्टैंडर्ड” करार दिया। शिरसाट ने यह भी संकेत दिया कि निदा खान केवल एक “पेड वर्कर” थी और इस कन्वर्जन रैकेट में किसी राजनीतिक पार्टी की भूमिका हो सकती है, जिससे मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
यह घटना महाराष्ट्र में अवैध निर्माण और अपराध से जुड़े व्यक्तियों को संरक्षण देने के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई का एक और उदाहरण प्रस्तुत करती है। मतीन पटेल के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई और जांच की संभावना बनी हुई है, खासकर निदा खान को पनाह देने के मामले में। वहीं, नासिक TCS केस में SIT की जांच जारी रहेगी, जिससे यौन शोषण और धार्मिक दबाव से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा होने की उम्मीद है। इस पूरे प्रकरण से राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरी बहस छिड़ सकती है, और आने वाले समय में इसके और भी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।











