प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने बुधवार को देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 14,114.81 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले दो प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं में दिल्ली में भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से एक 6,969.67 करोड़ रुपये की सुरंग परियोजना और उत्तर प्रदेश में 7,145.14 करोड़ रुपये का एक नया ग्रीनफील्ड राजमार्ग गलियारा शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि ये परियोजनाएं पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत कनेक्टिविटी सुधारने, यात्रा के समय को कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
दिल्ली द्वारका टनल: राजधानी को मिलेगी राहत
केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली में NH-148AE पर 8.1 किलोमीटर लंबी, छह-लेन वाली सड़क सुरंग के निर्माण को मंजूरी दी है, जो द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज में नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 6,969.67 करोड़ रुपये है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में दक्षिणी रिज के नीचे 3.14 किलोमीटर की एक जुड़वां-ट्यूब सुरंग भी शामिल है, जिसका निर्माण टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग करके किया जाएगा ताकि सतह पर होने वाले व्यवधानों को कम किया जा सके। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत लागू की जाएगी, जिसमें सरकार निर्माण के दौरान परियोजना लागत का 40 प्रतिशत वहन करती है और शेष राशि परिचालन चरण के दौरान वार्षिकी के रूप में भुगतान करती है। यह सुरंग पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार करेगी और गुरुग्राम, द्वारका तथा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दक्षिणी दिल्ली की ओर यातायात की आवाजाही को आसान बनाएगी। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस परियोजना को पूरा होने में लगभग पाँच साल लगेंगे और इससे लगभग 7.54 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 9.80 लाख व्यक्ति-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में नया ग्रीनफील्ड हाईवे
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में 117.7 किलोमीटर लंबे, चार/छह-लेन वाले एक्सेस-नियंत्रित कानपुर-कबराई ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 7,145.14 करोड़ रुपये है। यह परियोजना NH(O) कार्यक्रम के तहत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) टोल मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इस मॉडल में, निजी डेवलपर्स टोल संग्रह के माध्यम से अपने निवेश की वसूली करते हैं। 80-100 किमी प्रति घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किए गए इस गलियारे से कानपुर और कबराई के बीच यात्रा का समय लगभग साढ़े तीन घंटे से घटकर सिर्फ डेढ़ घंटे रह जाने की उम्मीद है। यह न केवल यात्रा को तेज और अधिक कुशल बनाएगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। वैष्णव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राजमार्ग परियोजना के ढाई साल के भीतर पूरा होने की संभावना है। यह गलियारा लगभग 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने और वित्तीय वर्ष 2028 तक लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (PCUs) के वार्षिक औसत दैनिक यातायात को संभालने की उम्मीद है।
पीएम गतिशक्ति का अहम हिस्सा और आर्थिक प्रभाव
ये दोनों परियोजनाएं पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पीएम गतिशक्ति योजना विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एकीकृत नियोजन और समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक मंच पर लाती है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की दक्षता बढ़ती है। दिल्ली की सुरंग परियोजना राजधानी की बढ़ती यातायात समस्या का एक स्थायी समाधान प्रदान करेगी, जबकि कानपुर-कबराई ग्रीनफील्ड हाईवे उत्तर प्रदेश के आर्थिक गलियारे को नई गति देगा। इन परियोजनाओं से न केवल यात्रा सुगम होगी बल्कि परिवहन लागत में कमी आएगी, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, ये 14,115 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे भारत की बुनियादी ढांचा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।










