कैबिनेट ने जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठन को दी मंजूरी, नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई और युवाओं के संरक्षण पर रहेगा फोकस।
रायपुर। राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य राज्यभर में नशे के खिलाफ सख्त और संगठित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक जिले में गठित की जाने वाली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स नशीले पदार्थों की तस्करी, बिक्री और सेवन से जुड़े मामलों पर निगरानी रखेगी। यह टास्क फोर्स पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य और संबंधित विभागों के समन्वय से कार्य करेगी।
नई व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका अहम होगी। टास्क फोर्स को स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई, खुफिया सूचना संकलन और अंतर-जिला समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। साथ ही, नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर टास्क फोर्स के गठन से नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से युवा वर्ग को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए जागरूकता अभियान और परामर्श कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
कैबिनेट बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स आधुनिक तकनीक और डाटा आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग करेगी। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रहे नशे के कारोबार पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नशे के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह कदम समय की मांग था। इससे समाज में कानून व्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिला स्तरीय ढांचे से स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा और त्वरित समाधान संभव होगा। इससे पहले राज्य स्तर पर चल रही कार्रवाई को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, कैबिनेट का यह निर्णय राज्य में नशा उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलने की उम्मीद है।








