मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि वैज्ञानिक खनन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब सतत विकास की नई पहचान बना रहा है।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब वैज्ञानिक पद्धति और नवाचारी खनन नीति के माध्यम से विकास और पारदर्शिता की नई कहानी लिख रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के दोहन में पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी दक्षता और जनहित को समान महत्व दे रही है, ताकि खनन केवल राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का साधन बने।

मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर में आयोजित “खनिज विकास सम्मेलन 2025” को संबोधित कर रहे थे, जिसमें देशभर के उद्योगपति, नीति विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और पर्यावरणविद शामिल हुए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खनन का नया युग:
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में अब खनन कार्य वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं। GIS, ड्रोन सर्वेक्षण, और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खदानों की निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य ने “स्मार्ट माइनिंग मिशन” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य खनन में पारदर्शिता, दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा — “खनन केवल खनिज निकालने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह हमारे प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की कला है।”
पारदर्शी प्रशासन और डिजिटल नवाचार:
छत्तीसगढ़ सरकार ने खनन क्षेत्र में ई-नीलामी प्रणाली, मिनरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग पोर्टल, और ऑनलाइन रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था लागू की है।
इन सुधारों से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी रोक लगी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमने खनन क्षेत्र को डिजिटल रूप से इतना सशक्त बनाया है कि अब हर ट्रक, हर रॉयल्टी और हर परिवहन का डेटा रियल टाइम में उपलब्ध है।”
जनहित और पर्यावरणीय संतुलन पर जोर:
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक खदान में ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट, वनीकरण योजना और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए गए हैं।
राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए “हरित खदान अभियान” के तहत अब तक 15 लाख से अधिक पौधे खदान क्षेत्रों में लगाए गए हैं।
स्थानीय जनता की भागीदारी:
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “खनन के लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उसका प्रत्यक्ष असर स्थानीय जनता तक पहुंचे।”
इसके लिए राज्य में DMF (District Mineral Foundation) फंड के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, और महिला सशक्तिकरण परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
केवल 2024-25 में ही DMF के तहत 3500 करोड़ रुपये से अधिक राशि ग्रामीण विकास कार्यों में खर्च की गई है।
उद्योग और रोजगार में वृद्धि:
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक खनन पद्धतियों से राज्य में नए औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिला है।
कोरबा, रायगढ़, जगदलपुर और बालोद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार से हजारों युवाओं को रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि “खनन और औद्योगिक विकास का यह समन्वय ही छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जा रहा है।”
पर्यावरणीय निगरानी के नए उपाय:
राज्य सरकार ने खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभावों की निगरानी के लिए AI आधारित सेंसर सिस्टम और सैटेलाइट इमेजिंग मॉड्यूल लागू किया है।
इन प्रणालियों से खनन गतिविधियों के दौरान वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “खनन तभी सफल कहा जाएगा जब उसकी प्रक्रिया में पर्यावरण और मानव के बीच संतुलन बना रहे।”
राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा:
भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को खनन पारदर्शिता और नीति क्रियान्वयन में शीर्ष राज्यों में शामिल किया गया है।
राज्य की पहल — ई-खनन मॉनिटरिंग, डिजिटल माइनिंग पोर्टल, और DMF सोशल ऑडिट सिस्टम — अब अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन रही हैं।
भविष्य की योजनाएं:
मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि राज्य में “इनोवेटिव माइनिंग क्लस्टर प्रोजेक्ट” शुरू किया जाएगा, जिसके तहत खनन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी हब और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा “ग्रीन माइनिंग फेलोशिप प्रोग्राम” के जरिए राज्य के इंजीनियरिंग छात्रों को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, “हम खनन को भविष्य के अनुरूप बना रहे हैं — जहाँ विकास, पर्यावरण और पारदर्शिता तीनों साथ-साथ चलें।”
मुख्यमंत्री की अपील:
मुख्यमंत्री ने खनन कंपनियों से कहा कि वे केवल व्यावसायिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व के साथ कार्य करें।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि “छत्तीसगढ़ की धरती ने हमें खनिजों का खजाना दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसका उपयोग जनहित और प्रकृति के संतुलन के लिए करें।”
निष्कर्ष:
वैज्ञानिक दृष्टिकोण, डिजिटल नवाचार और सामाजिक सहभागिता के साथ छत्तीसगढ़ आज खनन क्षेत्र में ‘विकास और पारदर्शिता का आदर्श मॉडल’ बन चुका है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की नेतृत्व में राज्य ने यह साबित किया है कि जब विज्ञान, नीति और संवेदना एक साथ चलते हैं, तो विकास वास्तव में स्थायी बनता है।








