एकता परेड 2025 में छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई। झांकी देगी राज्य की एकता, विकास और सांस्कृतिक गौरव का संदेश।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और विकास यात्रा को देश के सामने प्रदर्शित करने का गौरव एक बार फिर राज्य को मिला है। इस वर्ष “एकता परेड-2025” में छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह झांकी राज्य की एकता, प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“छत्तीसगढ़ की झांकी हमारे राज्य की जनभावना, संस्कृति और विकास का संगम होगी। यह भारत की विविधता में एकता की भावना को और मजबूत करेगी।”
झांकी का थीम — “एकता में विकास, संस्कृति में गौरव”
सूत्रों के अनुसार इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी का थीम “एकता में विकास, संस्कृति में गौरव” निर्धारित किया गया है। इसमें राज्य की समृद्ध लोककला, आदिवासी परंपराएं, हस्तशिल्प, जनउत्सव और विकास परियोजनाएं को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
झांकी में बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर और रायपुर संभाग की सांस्कृतिक विशेषताओं को समाहित किया जाएगा।
मुख्य आकर्षण के रूप में धान की बालियां, मुरिया नृत्य, माटी कला, और नवा रायपुर के विकास कार्यों के प्रतीक चिन्ह शामिल किए जाएंगे।
दिल्ली में होगी प्रस्तुति
यह झांकी राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर) को दिल्ली में आयोजित “एकता परेड” में प्रदर्शित की जाएगी।
देशभर से चुनी गई राज्यों की झांकियों में छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति को एक सांस्कृतिक और विकासमूलक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि झांकी के डिजाइन और निर्माण की जिम्मेदारी राज्य के प्रसिद्ध लोक कलाकारों और डिजाइन विशेषज्ञों को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने दी कलाकारों और टीम को शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झांकी निर्माण में शामिल कलाकारों, शिल्पकारों और अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा —
“छत्तीसगढ़ की झांकी हमारे राज्य के गौरवशाली अतीत और प्रगतिशील वर्तमान की झलक पेश करेगी। यह देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को और सशक्त बनाएगी।”
उन्होंने कहा कि यह झांकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को भी मूर्त रूप देगी।
सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास का संगम
छत्तीसगढ़ की झांकी में पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और लोकसंगीत के साथ-साथ आधुनिक विकास परियोजनाओं का भी समावेश होगा।
इसमें धान उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका, वन आधारित आजीविका, और नवा रायपुर के हरित विकास मॉडल को दिखाया जाएगा।
झांकी का अंतिम दृश्य “एकता और विकास” के प्रतीक के रूप में बनाया जा रहा है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ भारत माता की जयकार करते दिखेंगे।
राज्य की पहचान बनेगी यह झांकी
यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ की झांकी ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
पिछले वर्षों में भी छत्तीसगढ़ की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड और सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष सराहना मिली थी।
इस बार “एकता परेड” में चयन होने से राज्य की सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर फिर से पहचान मिलेगी।
संस्कृति मंत्री ने कहा — “जनभागीदारी से बनी सफलता की कहानी”
छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री ने भी इस चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा —
“यह उपलब्धि केवल विभाग की नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश की है। कलाकारों, कारीगरों और युवाओं की भागीदारी ने इसे संभव बनाया है।”
उन्होंने कहा कि झांकी में दिखाए गए हर दृश्य में छत्तीसगढ़ की आत्मा और लोकजीवन की गहराई झलकती है।
कलाकारों में उत्साह
झांकी के निर्माण में शामिल बस्तर, कोरिया और जशपुर के लोक कलाकारों ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है।
कलाकारों का कहना है कि वे इस प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपरा को देशभर में पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा राज्य का गौरव
“एकता परेड” में छत्तीसगढ़ की झांकी के शामिल होने से राज्य को पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में भी नई पहचान मिलने की संभावना है।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस झांकी से राज्य की परंपरा, हस्तकला और विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री का संदेश — “एकता ही विकास का आधार”
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा —
“छत्तीसगढ़ की झांकी हमारे राज्य के लोगों की मेहनत, एकता और समर्पण की कहानी कहेगी। यही एकता हमें विकास के पथ पर आगे ले जाती है।”
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करें और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।
निष्कर्ष
“एकता परेड 2025” में छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन राज्य के लिए एक सांस्कृतिक सम्मान और विकास की स्वीकृति है।
यह झांकी देश को दिखाएगी कि छत्तीसगढ़ केवल परंपराओं का राज्य नहीं, बल्कि नवाचार और एकता की प्रेरक भूमि भी है।








