कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने आदिवासी क्षेत्रों में टीबी, कुष्ठ रोग और सिकलसेल जैसी बीमारियों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने हेतु कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मोहला। जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में अब स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने सोमवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने खासतौर पर स्वास्थ्य विभाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि जिले के दुर्गम एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गंभीर बीमारियों के लिए कार्ययोजना बनाकर विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाए।
कलेक्टर प्रजापति ने कहा कि टीबी, कुष्ठ रोग और सिकलसेल जैसी बीमारियां आदिवासी क्षेत्रों में अधिक पाई जाती हैं, जिन्हें समय पर जांच और इलाज की आवश्यकता होती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को विशेष कार्ययोजना बनानी होगी ताकि इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को तुरंत पहचान कर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग को मिली बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि शिविर लगाने से पहले संबंधित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए। इससे यह पता चल सकेगा कि किन इलाकों में इन बीमारियों का खतरा ज्यादा है। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर वहां स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि शिविरों में सिर्फ जांच ही नहीं बल्कि उपचार की व्यवस्था भी होनी चाहिए। मरीजों को दवाइयां, परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल तक रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस
मोहला जिला आदिवासी जनसंख्या वाला इलाका है, जहां आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित है। कलेक्टर ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी सूरत में आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य शिविर केवल औपचारिकता न होकर, वास्तविक लाभ देने वाले होने चाहिए। शिविरों में जनजागरूकता गतिविधियां भी शामिल हों ताकि लोग लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज के लिए सामने आएं।
अन्य विभागों की समीक्षा भी
बैठक में केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के कार्यों की भी समीक्षा हुई। कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुँचे, इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा। उन्होंने समयबद्धता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया।
शिविरों से मिलेगी बड़ी राहत
जिले के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए गए तो टीबी, कुष्ठ रोग और सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। शिविरों में प्रारंभिक स्तर पर बीमारी पकड़ में आ जाने से इलाज आसान हो जाता है और मरीज को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील
कलेक्टर प्रजापति ने बैठक में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों से भी सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिविरों की सफलता लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी और लोगों को शिविरों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना होगा।
निष्कर्ष
कलेक्टर तुलिका प्रजापति के निर्देशों के बाद अब जिले में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यदि कार्ययोजना को गंभीरता से लागू किया गया तो निश्चित ही आदिवासी क्षेत्रों के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे और गंभीर बीमारियों से समय पर बचाव हो सकेगा।








