राज्यपाल रमेन डेका से केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की।
रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने राजभवन में सौजन्य मुलाकात की। यह भेंट औपचारिक होते हुए भी अत्यंत सार्थक रही, जिसमें दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने छत्तीसगढ़ राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधोसंरचना विकास से जुड़ी योजनाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री के बीच रचनात्मक संवाद
भेंट के दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और परंपरा देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि सरकार की विकास योजनाओं का लाभ दूरस्थ वनांचल तक पहुंचे, यह शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम ने राज्यपाल को केंद्र सरकार की “प्रधानमंत्री जनजातीय सशक्तिकरण योजना”, “विवेकानंद आदिवासी शिक्षा योजना” और “वन धन विकास केंद्र” जैसी महत्वपूर्ण पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना है।
शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर
राज्यपाल श्री डेका ने चर्चा के दौरान कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है। उन्होंने जनजातीय इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शिक्षण सुविधाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री ओराम ने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय विद्यार्थियों के लिए रेज़िडेंशियल स्कूल, ई-लर्निंग सुविधाओं और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में तकनीकी शिक्षा और पारंपरिक कौशल का समन्वय जनजातीय युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा।
वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी हुई चर्चा
बैठक में राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने वन आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त करने पर भी विचार-विमर्श किया। श्री डेका ने कहा कि राज्य के जंगलों में तेंदूपत्ता, महुआ, चार, सालबीज और लाख जैसे उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
केंद्रीय मंत्री श्री ओराम ने बताया कि केंद्र सरकार इन उत्पादों के वैल्यू एडिशन और मार्केट लिंकिंग के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि वन धन विकास केंद्र (VDFC) मॉडल ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा दे रहा है, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक लाभ हो रहा है।
महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका पर सराहना
राज्यपाल ने इस अवसर पर जनजातीय क्षेत्रों में सक्रिय महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं जब आत्मनिर्भर होती हैं, तो पूरा समाज सशक्त होता है।
श्री ओराम ने बताया कि केंद्र सरकार जनजातीय महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए “महिला वन धन समूह योजना” चला रही है, जिससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जनजातीय स्वास्थ्य और पोषण पर बातचीत
राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कुपोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और आयुष पद्धति के प्रचार से संबंधित विषयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को और बेहतर बनाएंगी।
संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर सहमति
राज्यपाल श्री डेका और केंद्रीय मंत्री श्री ओराम ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला, नृत्य और परंपराएँ केवल राज्य की पहचान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक हैं।
दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि जनजातीय पर्यटन, सांस्कृतिक उत्सवों, और हस्तशिल्प प्रदर्शनी को प्रोत्साहन देकर स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को वैश्विक मंच दिया जा सकता है।
भेंट के दौरान सकारात्मक माहौल
राजभवन में हुई इस भेंट का वातावरण सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक रहा। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने केंद्रीय मंत्री को छत्तीसगढ़ की प्रगति से संबंधित नवीनतम जानकारियाँ साझा कीं और राज्य के जनजातीय अंचलों में सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।
भेंट के अंत में राज्यपाल ने श्री ओराम को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कलाकृतियाँ स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट कीं।
जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में साझा संकल्प
इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने यह संकल्प दोहराया कि जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा में लाना ही उनके प्रयासों का प्रमुख लक्ष्य रहेगा।
श्री ओराम ने कहा —
“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हम चाहते हैं कि हर जनजातीय परिवार आत्मनिर्भर बने और उसकी जीवन-गुणवत्ता बेहतर हो।”
राज्यपाल श्री डेका ने कहा —
“छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव अपनी मेहनत, ईमानदारी और संस्कृति से देश को दिशा दी है। राज्य सरकार और केंद्र के संयुक्त प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊंचाइयां छूएगा।”
समापन — संवाद और सहयोग का नया अध्याय
राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री की यह भेंट केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनजातीय विकास की दिशा में सहयोग का एक नया अध्याय साबित हुई। दोनों नेताओं ने मिलकर इस बात पर बल दिया कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब वे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हों।
भविष्य में इस प्रकार की मुलाकातें राज्य और केंद्र के बीच विकासात्मक समन्वय को और सुदृढ़ करेंगी।








