संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्राम रीवां के पुरातात्विक उत्खनन स्थल का निरीक्षण कर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन संभावनाओं पर जोर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने ग्राम रीवां में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन स्थल का दौरा कर वहां किए जा रहे शोध एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों से उत्खनन की प्रगति, प्राप्त अवशेषों और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि ग्राम रीवां में हो रहा उत्खनन छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां से प्राप्त अवशेष प्रदेश की सभ्यता, जीवनशैली और ऐतिहासिक कालखंडों पर नई रोशनी डाल सकते हैं।
उत्खनन कार्यों की सराहना
श्री अग्रवाल ने पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक उत्खनन कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और अधिक सशक्त होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्खनन के दौरान प्राप्त सामग्री का विधिवत दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाए।
इतिहास और संस्कृति का संरक्षण जरूरी
संस्कृति मंत्री ने कहा कि पुरातात्विक धरोहर केवल अतीत की निशानी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होती है। राज्य सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है।
स्थानीय सहभागिता पर जोर
उन्होंने यह भी कहा कि उत्खनन स्थलों के विकास में स्थानीय समुदाय की सहभागिता जरूरी है। इससे लोगों में अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और पर्यटन की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
पर्यटन की दृष्टि से संभावनाएं
अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि उत्खनन पूर्ण होने के बाद इस स्थल को विरासत पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का यह दौरा छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।








