रायपुर में एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 8 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सरकार को चेतावनी दी कि दीपावली तक मांगे न पूरी हुईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज नया रायपुर के तुता धरना स्थल पर एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपनी 8 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार को ज्ञापन सौंपा।
धरना स्थल पर गूंजते नारों और हज़ारों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी आवाज़ को अब और नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा।
ज्ञापन सौंपा गया प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री के नाम
धरना स्थल पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अपनी मूलभूत जरूरतों और 8 सूत्री मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की गई।
दीपावली तक मांगे पूरी करने की चेतावनी
कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगे दीपावली से पहले पूरी नहीं की गईं, तो वे मजबूर होकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनका अंतिम धैर्य है। यदि समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।
प्रमुख 8 सूत्री मांगें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी 8 सूत्री मांगों में जिन बिंदुओं पर जोर दिया, उनमें शामिल हैं:
- मानदेय में वृद्धि और स्थायीकरण।
- सेवाओं का नियमितीकरण और पेंशन व्यवस्था।
- समान काम का समान वेतन।
- ग्रेच्युटी और अन्य लाभकारी योजनाओं का लाभ।
- सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान सुनिश्चित करना।
- मातृत्व लाभ और चिकित्सा सुविधाएँ।
- कार्य के घंटे और अवकाश संबंधी नियमों का निर्धारण।
- पदोन्नति और कैरियर ग्रोथ के अवसर।
सरकार पर भरोसा लेकिन चेतावनी बरकरार
धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा है। उनका विश्वास है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उनकी समस्याओं को समझेंगे और दीपावली से पहले समाधान देंगे।
लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि उनकी बातें नहीं सुनी गईं तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन को बड़े जनांदोलन में बदल देंगी।
महिला सशक्तिकरण का प्रतीक
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह विशाल धरना केवल आर्थिक और प्रशासनिक मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और समाज में उनकी भूमिका का भी प्रतीक है।
वे बच्चों की शिक्षा, पोषण, महिला कल्याण और ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाती हैं। उनके बिना सरकारी योजनाओं का सफल कार्यान्वयन असंभव है।
प्रशासन और समाज की प्रतिक्रिया
धरना स्थल पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद रहे।
समाज के विभिन्न वर्गों ने भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों को उचित ठहराया और कहा कि जो महिलाएँ गांव और शहरों में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का बोझ उठाती हैं, उन्हें उचित सम्मान और सुविधाएँ मिलनी ही चाहिए।
आंदोलन का राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह मुद्दा चुनावों में भी गूंज सकता है।
निष्कर्ष
रायपुर में हुआ यह विशाल धरना प्रदर्शन साबित करता है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आवाज़ अब नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती। सरकार पर भरोसा जताते हुए भी उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दे दी है। अब देखना यह होगा कि दीपावली से पहले उनकी मांगों को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।








