LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भूमि संसाधन सचिव की भेंट, भू-अभिलेख सुधार और डिजिटल सर्वे पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेख सुधार और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से भूमि प्रबंधन को पारदर्शी व प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। इसी क्रम में भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव मनोज जोशी ने आज विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की।

यह बैठक न केवल शिष्टाचार भेंट रही, बल्कि इसमें राज्य और केंद्र सरकार के बीच भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग, डिजिटल भूमि सर्वेक्षण, राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भू-अभिलेख प्रणाली को अद्यतन करने को लेकर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई।

राज्य की प्रतिबद्धता: भू-अभिलेख प्रणाली को आधुनिक बनाना
मुख्यमंत्री साय ने बैठक में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भू-राजस्व दस्तावेजों के अद्यतन और सुधार हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित और अद्यतन रिकॉर्ड ही राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के शीघ्र व प्रभावशाली निराकरण की कुंजी हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की भू-अभिलेख सुधार संबंधी पहलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है, ताकि यह प्रणाली और अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और जनहितकारी बन सके।

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डिजिटल तकनीकों से आएगी गति, सटीकता और पारदर्शिता
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डिजिटल नवाचारों की मदद से भू-अभिलेख प्रणाली को पारदर्शी और तेज़ बनाया जा रहा है। इससे विशेष रूप से किसानों, ग्रामीणों और शहरी नागरिकों को सटीक और प्रमाणिक भू-संबंधी जानकारी आसानी से प्राप्त होगी।

उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तत्परता से और प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह सुधार न केवल विवादों की रोकथाम में मदद करेगा, बल्कि भूमि खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को भी सरल बनाएगा।

केंद्रीय सचिव ने सराहा राज्य का प्रयास
भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यहां का प्रशासनिक सहयोग अनुकरणीय है।

उन्होंने बताया कि पहले पारंपरिक पद्धति से होने वाले भूमि सर्वेक्षण में समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी, लेकिन अब डिजिटल तकनीकों के उपयोग से यह कार्य तेज़, सटीक और भरोसेमंद हो गया है।

डिजिटल सर्वे और नक्शों के अद्यतन में तकनीकी मदद
जोशी ने बताया कि डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से नक्शों के अद्यतन में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इससे भूमि खरीद-बिक्री के दौरान होने वाली गड़बड़ियों में कमी आएगी और नागरिकों को अद्यतन, प्रमाणिक और स्पष्ट नक्शे समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है ताकि भू-अभिलेख संधारण प्रणाली और अधिक प्रभावशाली हो।

शहरी नियोजन और भूमि विवादों के समाधान में सहयोग
केंद्रीय सचिव ने कहा कि डिजिटल सर्वेक्षण और भू-नक्शों के अद्यतन से शहरी क्षेत्रों के नियोजित विकास में भी मदद मिलेगी। भूमि विवादों में भी न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण में यह पहल उपयोगी सिद्ध होगी।

उच्चस्तरीय अधिकारियों की सहभागिता
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे:

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह

भारत सरकार के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी

राजस्व सचिव अविनाश चंपावत

संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार

अन्य विभागीय अधिकारी

इन सभी अधिकारियों ने भू-अभिलेख सुधार और डिजिटल सर्वेक्षण की प्रगति एवं चुनौतियों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।

निष्कर्ष में: छत्तीसगढ़ बन रहा राष्ट्रीय मॉडल
यह बैठक छत्तीसगढ़ को भू-अभिलेख प्रबंधन में राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग से भू-राजस्व प्रणाली में हो रहे सुधार न केवल भूमि विवादों में कमी लाएंगे, बल्कि कृषि, आवास, शहरी नियोजन और निवेश जैसे क्षेत्रों को भी स्थायित्व और पारदर्शिता प्रदान करेंगे।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.