छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर तीन घटनाओं पर चिंता जताते हुए शिक्षा विभाग और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। हाल ही में प्रदेश में घटित तीन अलग-अलग घटनाओं ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद कोर्ट ने शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
बीते कुछ हफ्तों में तीन घटनाएं सामने आईं, जिनमें स्कूल परिसर के भीतर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठे। इनमें से दो मामले सरकारी स्कूलों और एक मामला निजी स्कूल से जुड़ा है। इन घटनाओं में लापरवाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अभाव का आरोप लगाया गया है।
कोर्ट का सख्त निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा संस्थान न केवल शिक्षा देने के लिए हैं, बल्कि वहां बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भी है।
रिपोर्ट में मांगी गई जानकारी
अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे घटनाओं का पूरा विवरण, सुरक्षा व्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति, और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दें।
माता-पिता में चिंता का माहौल
इन घटनाओं के बाद से अभिभावकों में गहरी चिंता है। कई माता-पिता का कहना है कि वे बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहना चाहते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं भरोसे को तोड़ती हैं।
सरकारी और निजी स्कूलों के लिए समान मानक
हाईकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मानकों में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए। सभी स्कूलों को CCTV कैमरे, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड, और आपातकालीन प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना होगा।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सभी स्कूलों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी।
पूर्व में भी दिए जा चुके हैं निर्देश
गौरतलब है कि हाईकोर्ट पहले भी कई बार स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर निर्देश दे चुका है। हालांकि, इन घटनाओं से साफ है कि अभी भी ज़मीनी स्तर पर कई खामियां बनी हुई हैं।
सख्त निगरानी की आवश्यकता
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके सख्त क्रियान्वयन और नियमित निगरानी से ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
आगे की कार्यवाही
अगली सुनवाई में अदालत के सामने शिक्षा विभाग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी।








