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छत्तीसगढ़

पीएम सूर्य घर योजना से अंबिकापुर के धीरेंद्र नाथ दुबे बने बिजली उत्पादक

अंबिकापुर निवासी धीरेंद्र नाथ दुबे ने पीएम सूर्य घर योजना से सोलर रूफटॉप लगाकर खुद को बिजली उत्पादक बनाया, खर्च घटा और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया।

अंबिकापुर । सूरज की किरणें धरती पर हर दिन असीम ऊर्जा लेकर आती हैं। यही ऊर्जा पौधों में प्रकाश संश्लेषण कर जीवन को बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन अब तकनीकी विकास और सरकारी योजनाओं के चलते यह ऊर्जा केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि घरेलू बिजली का स्थायी और सस्ता स्रोत भी बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” इसका बेहतरीन उदाहरण है।

यह कहानी है अंबिकापुर के प्रतापपुर नाका, शिवधारी कॉलोनी में रहने वाले धीरेंद्र नाथ दुबे की। दुबे ने इस योजना के तहत अपने घर की छत पर 5 केवीए का सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर न सिर्फ अपने बिजली खर्च को कम कर लिया, बल्कि स्वयं को बिजली उत्पादक बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।


हर महीने का बिल हुआ मामूली

धीरेंद्र दुबे बताते हैं कि पहले उनका मासिक बिजली बिल औसतन 1500 से 1600 रुपए तक आता था। यह खर्च उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डालता था। लेकिन अप्रैल 2025 में जब उनका सोलर रूफटॉप सिस्टम चालू हुआ, तो उनका बिल घटकर मात्र 120 रुपए रह गया। यानी पहले की तुलना में लगभग 90% की बचत

वे कहते हैं, “पहले महीने का बिल देखकर ही मुझे भरोसा हो गया कि यह निवेश लंबे समय तक राहत देने वाला है। अब मुझे बिजली की चिंता नहीं करनी पड़ती।”

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सीधे खाते में पहुँची सब्सिडी

दुबे को इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपए की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। सरकार की इस पारदर्शी प्रक्रिया से उन्हें योजना की विश्वसनीयता का अहसास हुआ।

उनका कहना है कि योजना में किसी प्रकार की जटिल प्रक्रिया या लंबी प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ा। सब्सिडी सीधे खाते में आने से आर्थिक बोझ और भी हल्का हो गया।


बैंक से त्वरित फाइनेंस सुविधा

सोलर पैनल लगवाने में सबसे बड़ी चुनौती आम तौर पर प्रारंभिक निवेश की होती है। लेकिन धीरेंद्र दुबे ने बताया कि उन्हें ग्रामीण बैंक से त्वरित फाइनेंस सुविधा मिल गई। बैंक ने केवल 5 दिनों के भीतर पूरा वित्तीय प्रबंध कर दिया और इसी वजह से उनका पूरा सोलर सिस्टम समय पर स्थापित हो सका।

वे कहते हैं, “सरकार की सब्सिडी और बैंक की मदद से यह निवेश केवल दो साल में ही पूरी तरह वसूल हो जाएगा। उसके बाद हमें पूरी तरह मुफ्त बिजली मिलेगी।”


केंद्र और राज्य सरकार से डबल लाभ

इस योजना की खासियत यह है कि उपभोक्ताओं को केवल केंद्र सरकार से ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार से भी लाभ मिल रहा है।

  • केंद्र सरकार: पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत 78,000 रुपए सब्सिडी
  • छत्तीसगढ़ शासन: अतिरिक्त 30,000 रुपए की सब्सिडी

यानी उपभोक्ता को कुल मिलाकर 1 लाख रुपए से अधिक की राहत मिल रही है। दुबे बताते हैं कि इस डबल सब्सिडी की वजह से यह योजना आम लोगों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।


आम जनता से अपील

धीरेंद्र दुबे का कहना है कि अब समय आ गया है जब लोग केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बनें। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर हम न केवल अपने खर्चे घटा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं। यह योजना हमें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने का अवसर देती है।”

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों का आभार व्यक्त किया और अपील की कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना का लाभ उठाएं।


पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान

सोलर पैनल लगाना सिर्फ बिजली बचत का उपाय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है।

  • सौर ऊर्जा से उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।
  • कोयला आधारित बिजली उत्पादन की निर्भरता घटती है।
  • हर 5 केवीए का सोलर सिस्टम सालभर में लगभग 7 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोक सकता है।

धीरेंद्र दुबे का मानना है कि अगर अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है कि भारत 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी देशों में शामिल हो। सोलर रूफटॉप जैसी योजनाएं इस लक्ष्य की ओर बड़ा कदम हैं।

अंबिकापुर के धीरेंद्र दुबे जैसे लोग इस बदलाव के प्रतीक हैं। उनके छोटे-से प्रयास से न केवल उनका परिवार आत्मनिर्भर बना है, बल्कि वे दूसरों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।


अन्य उपभोक्ताओं के लिए मार्गदर्शन

दुबे बताते हैं कि योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। उसके बाद संबंधित डिस्कॉम और बैंक से संपर्क कर फाइनेंस और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी होती है।

उनका कहना है कि प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी है। अगर सही जानकारी और मार्गदर्शन मिले तो कोई भी परिवार इस योजना से जुड़ सकता है।


निष्कर्ष

अंबिकापुर के धीरेंद्र नाथ दुबे की कहानी यह साबित करती है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने वाली योजना है।

आज दुबे अपने अनुभव से यह संदेश दे रहे हैं कि सौर ऊर्जा अपनाकर हम न केवल अपनी जेब को राहत दे सकते हैं, बल्कि प्रकृति को भी सुरक्षित रख सकते हैं। यह योजना आम आदमी को बिजली उपभोक्ता से बिजली उत्पादक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.