स्व-सहायता समूहों को लाख किट वितरण से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा, जिससे आजीविका सुदृढ़ होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
रायपुर। ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस क्रम में स्व-सहायता समूहों को लाख किट का वितरण किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि लाख उत्पादन आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक आजीविका का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। लाख किट के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को कच्चा माल, आवश्यक उपकरण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे व्यावसायिक स्तर पर लाख उत्पादन कर सकें।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी
लाख किट वितरण से महिला समूहों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। महिलाएं अब घर के पास ही रोजगार कर अपनी आय बढ़ा सकेंगी। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि महिलाओं का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। लाख उत्पादन और उससे जुड़े प्रसंस्करण कार्यों से स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को भी रोका जा सकेगा।
प्रशिक्षण और विपणन पर भी जोर
कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही उत्पादों के विपणन के लिए सरकारी और सहकारी मंचों से जोड़े जाने की योजना है, ताकि महिलाओं को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके।
सरकार की प्रतिबद्धता
छत्तीसगढ़ शासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। लाख किट वितरण जैसी योजनाएं ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
लाख किट प्राप्त करने वाली महिलाओं ने शासन की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने जीवन में बदलाव लाने वाला कदम बताया।








