सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसदीय समिति की बैठक में AI आधारित शिक्षा, रोजगार क्षमता और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी व मजबूत बनाने पर बल दिया।
नई दिल्ली/रायपुर, 1 जुलाई। रायपुर लोकसभा सांसद एवं शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बुधवार को संसद भवन, नई दिल्ली में आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक में श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सक्रिय सहभागिता की। बैठक के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उपाय तथा शिक्षा क्षेत्र में AI के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा प्रक्रिया से मिले अनुभवों और उनसे मिली सीख पर भी विचार-विमर्श किया गया। समिति के सदस्यों ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए कई सुझाव रखे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य एक मजबूत और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। ऐसे में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के लिए प्रभावी सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में AI का समावेश केवल डिजिटल तकनीक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों का विस्तार होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा प्रणाली को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना बेहद जरूरी है, ताकि भारतीय युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकें। आधुनिक तकनीकों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत मूल्यांकन प्रणाली देश के विकास की आधारशिला साबित होगी।
बैठक में समिति के अध्यक्ष श्री मुकुल वासनिक, वरिष्ठ सांसद श्री रवि शंकर प्रसाद, अंतरिक्ष विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन, उच्चतर शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक डॉ. अभिषेक सिंह सहित शिक्षा और तकनीक क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञों ने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि समिति में हुए व्यापक मंथन और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और शिक्षा को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।




