रायपुर में वनमंत्री ने 48 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनमंत्री श्री [मंत्री का नाम] ने आज रायपुर जिले में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 48 लाख रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। मंत्री ने कहा कि “विकास और पर्यावरण संरक्षण, दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। हमारी सरकार का लक्ष्य है—हर गांव में हरियाली के साथ समृद्धि लाना।”
भूमिपूजन समारोह का आयोजन स्थानीय पंचायत प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत विधि-विधान से हुई, जिसके बाद वनमंत्री ने शिलान्यास कर विकास कार्यों की औपचारिक शुरुआत की। जिन कार्यों का भूमिपूजन किया गया उनमें सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, वृक्षारोपण योजना, सामुदायिक भवन निर्माण और तालाब सौंदर्यीकरण जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं।
वनमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों में तेज़ी से विकास कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य सिर्फ निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि हर परियोजना के माध्यम से लोगों के जीवन में सुधार लाना है।”
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण-संवेदनशील विकास मॉडल को लागू किया जा रहा है। इसके तहत हर परियोजना में पौधारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता को अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि “हर सड़क के किनारे पेड़ लगाना, हर तालाब के चारों ओर हरियाली बढ़ाना—इन्हीं छोटे-छोटे कदमों से हम आने वाली पीढ़ी के लिए स्वस्थ पर्यावरण तैयार करेंगे।”
कार्यक्रम में मंत्री ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में वन विभाग राज्य के सभी जिलों में ‘हरित ग्राम अभियान’ शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत ग्राम पंचायतों को पौधारोपण और जैव-विविधता संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ की पहचान हरियाली से है। यह हमारा दायित्व है कि हम इस पहचान को न केवल बनाए रखें, बल्कि इसे और सशक्त करें।” उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पौधों की सुरक्षा को व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझें।
विकास कार्यों की सूची में ग्रामीण मार्गों के सुधार, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट लगाना, और पंचायत भवन के मरम्मत जैसे कई बुनियादी कार्य शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि “गांव का विकास तभी संभव है जब वहां की मूलभूत सुविधाएं मजबूत हों। हमारा प्रयास है कि हर गांव आत्मनिर्भर और स्वच्छ बने।”
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधन दिया और कहा कि वनमंत्री की पहल से क्षेत्र में विकास कार्यों की गति तेज़ हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
गांव की महिला स्व-सहायता समूहों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कहा कि सामुदायिक भवन बनने से उन्हें प्रशिक्षण और बैठक के लिए स्थायी स्थान मिलेगा। युवाओं ने भी मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नए सड़क निर्माण और लाइट व्यवस्था से आवागमन और सुरक्षा में सुधार होगा।
वनमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए वन संपदा का सतत उपयोग सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि “वन संसाधनों से जुड़े कार्यों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी आवश्यक है। हम चाहते हैं कि जंगलों से जुड़ी हर योजना में गांव के लोग साझेदार बनें।”
उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग ने इस वर्ष राज्यभर में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें स्कूलों, पंचायतों, और सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि “प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही विकास का वास्तविक आधार है। जब हम पेड़ों, जलस्रोतों और मिट्टी की रक्षा करेंगे, तभी स्थायी विकास संभव होगा।”
कार्यक्रम के अंत में वनमंत्री ने गांव के बच्चों और महिलाओं को पौधे वितरित किए और उन्हें अपने नाम से पेड़ लगाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि “हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, यही सच्ची देशसेवा है।”
इस अवसर पर जिला कलेक्टर, मुख्य वनसंरक्षक, स्थानीय सरपंच, ब्लॉक अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने कार्यक्रम के बाद मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्षों से लंबित विकास कार्यों को अब गति मिली है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, और पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और उत्साह का माहौल देखा गया।
वनमंत्री की यह पहल न केवल भौतिक विकास की दिशा में कदम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।








