छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण की चौथी बैठक में वेटलैण्ड संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा, सतत विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण की चतुर्थ बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के वेटलैण्ड क्षेत्रों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में सुझाव प्रस्तुत किए।
वेटलैण्ड संरक्षण की रणनीति पर जोर
बैठक के दौरान राज्य के प्रमुख वेटलैण्ड क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जैव विविधता और जल संरक्षण के लिए वेटलैण्ड अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जा रही है।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर चर्चा
विशेषज्ञों ने कहा कि वेटलैण्ड प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो जल संरक्षण, वन्यजीवों के आवास और जलवायु संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। बैठक में इन क्षेत्रों को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी
प्राधिकरण ने वेटलैण्ड संरक्षण में स्थानीय समुदायों और स्वयं सहायता समूहों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। अधिकारियों का कहना है कि जनसहभागिता से संरक्षण प्रयास अधिक प्रभावी बन सकते हैं।
सतत पर्यटन की संभावनाएं
बैठक में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। वेटलैण्ड क्षेत्रों को पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
निगरानी और डेटा प्रबंधन
अधिकारियों ने वेटलैण्ड क्षेत्रों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल डेटा प्रबंधन प्रणाली के उपयोग पर बल दिया। इससे संरक्षण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग संभव होगी।
भविष्य की कार्ययोजना
बैठक के अंत में वेटलैण्ड संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और कार्ययोजनाओं पर सहमति बनाई गई। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में जागरूकता कार्यक्रम और संरक्षण अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा।








