AAFT यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका और विधायक अनुज शर्मा शामिल हुए। अनुज ने शिक्षा को आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता का माध्यम बताया।
रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित AAFT University के दीक्षांत समारोह में आज एक गरिमामय माहौल देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, मंत्री टंकराम वर्मा और धरसींवा विधायक अनुज शर्मा मुख्य मंच पर उपस्थित हुए। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ और स्नातक छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। समारोह में शिक्षा, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता के मूल्यों को केंद्र में रखते हुए एक प्रेरणादायक संदेश दिया गया।
विधायक अनुज शर्मा ने दीक्षांत समारोह में दी प्रेरणादायक सीख
अपने संबोधन में विधायक अनुज शर्मा ने शिक्षा के गहन उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा —
“भारतीय परंपरा में शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता का माध्यम माना गया है।”
उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक अवसर नहीं, बल्कि आत्मविकास, समर्पण और सृजनशीलता का उत्सव है।
अनुज शर्मा ने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
वेदों से जोड़ा शिक्षा का शाश्वत दृष्टिकोण
विधायक शर्मा ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋग्वेद में कहा गया है — “ज्ञान साधारण को असाधारण में और संभावनाओं को शक्ति में परिवर्तित करता है।”
उन्होंने बताया कि भारतीय सभ्यता में विद्या और कला को हमेशा एक-दूसरे का पूरक माना गया है।
शर्मा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति (NEP) इसी शाश्वत दृष्टिकोण को आधुनिक युग में पुनः स्थापित कर रही है।
“शिक्षा केवल सूचना नहीं, बल्कि सृजनशीलता की प्रक्रिया है”
विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति यह स्पष्ट करती है कि शिक्षा केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यक्ति को कर्मशील, नवाचारी और सृजनात्मक बनने की प्रेरणा देनी चाहिए।
उन्होंने कहा —
“असली सफलता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि कौशल से मिलती है। कौशल ही व्यक्ति के आत्मबल और आत्मविश्वास की नींव है।”
AAFT यूनिवर्सिटी की सराहना — मीडिया और आर्ट्स में नई दिशा
अनुज शर्मा ने AAFT यूनिवर्सिटी (मीडिया एंड आर्ट्स) की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था कौशल आधारित और सृजनशील शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा —
“AAFT यूनिवर्सिटी ने मीडिया और कला शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों से जोड़ते हुए सशक्त पहचान बनाई है।”
उन्होंने कहा कि यहाँ शिक्षा केवल कल्पना तक सीमित नहीं है, बल्कि परिश्रम, सटीकता और व्यावहारिक दक्षता पर समान रूप से केंद्रित है।
‘करके सीखना’ ही सच्ची शिक्षा है — अनुज शर्मा
अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि कैसे संगीत और रंगमंच के प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। उन्होंने कहा —
“करके सीखना ही सच्ची शिक्षा है। अभ्यास से जो कौशल विकसित होता है, वही व्यक्ति को आत्मविश्वास और समाज से जुड़ाव प्रदान करता है।”
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने जीवन में शिक्षा को केवल करियर का माध्यम न बनाएं, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र निर्माण का उपकरण बनाएं।
स्नातकों को दी शुभकामनाएँ
विधायक शर्मा ने समारोह में उपस्थित सभी स्नातक छात्रों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा —
“आपकी उपाधि केवल आपके अध्ययन का परिणाम नहीं, बल्कि आपके धैर्य, अनुशासन और सृजनशीलता का प्रतीक है। आपकी प्रतिभा आपके कर्म से निखरे और आपका हृदय सदैव संवेदनशील बना रहे।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज की बेहतरी और देश के विकास के लिए करना चाहिए।
मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने किया छात्र-छात्राओं का सम्मान
कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश के भविष्य की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि मानवता, नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना जगाने का माध्यम है।
कार्यक्रम में रहे प्रमुख अतिथि और गणमान्य उपस्थित
इस अवसर पर मंच पर राज्यपाल रमेन डेका, मंत्री टंकराम वर्मा, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, डॉ. संदीप मरवाह, विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर, व्याख्याता एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियाँ और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।
समारोह में झलकी भारतीय परंपरा और आधुनिकता का संगम
दीक्षांत समारोह में भारतीय पारंपरिक संगीत और वेशभूषा के साथ आधुनिक मीडिया प्रस्तुतियों का अनोखा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में ‘गुरुकुल’ जैसी भावना और ‘डिजिटल भारत’ जैसी ऊर्जा का सुंदर समन्वय रहा।
समापन
समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा केवल परीक्षा या डिग्री का परिणाम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और मानवता के उत्थान का माध्यम है।








