धमतरी से शुरू हुई ग्रीन आतिशबाजी परियोजना, 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला, पर्यावरणीय सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
रायपुर। धमतरी जिले में पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन आतिशबाजी का उत्पादन शुरू होने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इस परियोजना के तहत 100 से अधिक महिलाओं को स्थायी रोजगार मिला है।
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धमतरी में स्थापित यह ग्रीन आतिशबाजी उत्पादन केंद्र, पारंपरिक आतिशबाजी के मुकाबले पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित और धुएं रहित है। इस पहल का उद्देश्य न केवल त्योहारों के दौरान सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त आतिशबाजी उपलब्ध कराना है, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है।
परियोजना के संयोजक ने बताया कि इस केंद्र में महिलाओं को आतिशबाजी के निर्माण और पैकिंग के काम में प्रशिक्षित किया गया है। इससे उन्हें घरेलू और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्थायी आय का स्रोत मिला है। उन्होंने कहा, “यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और धमतरी के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है।”
स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से इस परियोजना को विशेष समर्थन प्राप्त है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का एक सफल उदाहरण है।
ग्रीन आतिशबाजी का उत्पादन स्थानीय सामग्री और आधुनिक तकनीक के संयोजन से किया जा रहा है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग किया जाता है, जिससे न केवल उत्पाद सुरक्षित बनते हैं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी हैं।
इस पहल के तहत, महिलाओं को उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और पैकेजिंग में प्रशिक्षण दिया गया। इससे उनके कौशल में सुधार हुआ है और उन्हें भविष्य में और बड़े उद्योगों में रोजगार पाने की संभावना भी बढ़ी है।
धमतरी से उत्पादित यह ग्रीन आतिशबाजी जल्द ही देशभर के बाजारों में उपलब्ध होगी। इसके वितरण के लिए राज्य सरकार ने विशेष योजना बनाई है, ताकि त्योहारों के दौरान यह सभी शहरों और राज्यों में पहुंच सके।
स्थानीय महिलाएं इस परियोजना को अपने जीवन में बदलाव लाने वाला अवसर मान रही हैं। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें न केवल वित्तीय सुरक्षा मिली है, बल्कि अपने आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान को भी बढ़ावा मिला है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि पारंपरिक आतिशबाजी के मुकाबले ग्रीन आतिशबाजी से वायु और ध्वनि प्रदूषण में काफी कमी आएगी। यह पहल प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षित उत्सव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय प्रशासन ने घोषणा की है कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक महिलाओं और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
धमतरी की यह पहल न केवल आर्थिक विकास और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि यह राज्य में हरित तकनीक और टिकाऊ विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
इस परियोजना की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय संसाधनों और आधुनिक तकनीक के मिश्रण से रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण दोनों संभव हैं। इससे अन्य जिलों और राज्यों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे इसी तरह के मॉडल अपनाकर सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं।
अंततः, धमतरी की ग्रीन आतिशबाजी परियोजना यह संदेश देती है कि पर्यावरणीय संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन एक साथ संभव हैं। राज्य सरकार इस पहल को और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।










