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छत्तीसगढ़

करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी का खुलासा, 170 से अधिक बोगस फर्मों का नेटवर्क बेनकाब

रायपुर में करोड़ों की जीएसटी चोरी का खुलासा। 170 से अधिक बोगस फर्म बनाकर फर्जी लेन-देन और ITC क्लेम से सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान पहुँचाया गया।

रायपुर। राजधानी रायपुर में जीएसटी विभाग ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के इस मामले में 170 से अधिक बोगस फर्मों के जरिए फर्जी लेन-देन और टैक्स चोरी का खेल सामने आया है। यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा रहा था।


जांच में हुआ बड़ा खुलासा

जीएसटी विभाग की स्पेशल टीम ने छापेमारी और डिजिटल जांच के दौरान पाया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ों और झूठी पहचान के आधार पर कंपनियों का पंजीकरण कराया। इन फर्मों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी दावा किया गया और करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी की गई।


170 से अधिक फर्में बनीं चोरी का जरिया

जांच में सामने आया कि इन बोगस फर्मों का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। इनका इस्तेमाल केवल फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के लिए किया गया। विभाग का अनुमान है कि इन फर्मों के जरिए अब तक कई सौ करोड़ रुपए के लेन-देन दिखाए जा चुके हैं।


आरोपियों की पहचान और कार्रवाई

प्राथमिक जांच में कई व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, जो इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। इनमें कुछ पेशेवर और कारोबार से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। जीएसटी विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी, टैक्स चोरी और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने के मामले दर्ज किए हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ भी शुरू हो चुकी है।

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modus operandi: कैसे होती थी चोरी

  • फर्जी पैन और आधार कार्ड के जरिए फर्म का पंजीकरण।
  • बिना किसी वास्तविक कारोबार के फर्जी बिल जारी करना।
  • आईटीसी का दावा कर टैक्स चोरी करना।
  • बोगस फर्मों के जरिए काले धन को सफेद करना।

विभाग की सख्त कार्रवाई

जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि टैक्स चोरी और फर्जी फर्म बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कई फर्मों का पंजीकरण रद्द किया और उनके बैंक खातों की जांच शुरू की है। साथ ही आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी इस मामले की सूचना दी गई है।


राजस्व को बड़ा नुकसान

अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले से सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। यह पैसा सार्वजनिक विकास कार्यों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन चोरी के कारण राजस्व प्रभावित हुआ।


जनता और व्यापार जगत की प्रतिक्रिया

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बोगस फर्मों के कारण ईमानदार कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि फर्जीवाड़ा करने वालों पर कड़ी सज़ा दी जाए। वहीं, नागरिकों ने इसे कर चोरी की गंभीर समस्या बताया और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत जताई।


भविष्य की रोकथाम

विभाग ने कहा कि अब नए फर्मों के पंजीकरण में कड़े सत्यापन मानक लागू किए जाएंगे। साथ ही, डिजिटल निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फर्जी लेन-देन को ट्रैक करने की तैयारी की जा रही है।


निष्कर्ष

रायपुर में सामने आया यह जीएसटी चोरी का मामला केवल टैक्स फर्जीवाड़े का उदाहरण नहीं, बल्कि सिस्टम में व्याप्त खामियों को भी उजागर करता है। अब यह देखना अहम होगा कि विभाग की कार्रवाई से कितना सुधार आता है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.