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छत्तीसगढ़

नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक सफलता — चार महिला समेत सात नक्सलियों का आत्मसमर्पण, उदंती एरिया कमेटी ने डाले हथियार

गरियाबंद में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता, चार महिला समेत सात नक्सलियों ने हथियार डाले। 37 लाख के इनामी नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सल उन्मूलन के मोर्चे पर शुक्रवार को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस-सीआरपीएफ के सतत अभियानों के परिणामस्वरूप प्रतिबंधित उदंती एरिया कमेटी के सात सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में चार महिला और तीन पुरुष नक्सली शामिल हैं।

इनमें दो नक्सली — डिविजनल कमेटी सदस्य सुनील उर्फ जगतार सिंह और उदंती एरिया कमेटी सचिव अरीना टेकोम उर्फ मुरगु — सबसे बड़े नाम हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके साथ डिप्टी कमांडर विद्या उर्फ जम्बो, लुद्रो उर्फ अनिल, नंदनी, कांति उर्फ मंगलबती और मललेश ने भी आत्मसमर्पण किया। इनमें से प्रत्येक पर 5 से 1 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था।

कुल मिलाकर 37 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों ने पुलिस लाइन गरियाबंद में अपने हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने 1 एसएलआर, 3 इंसास राइफल और एक सिंगल शॉट गन समेत कुल 6 हथियार पुलिस को सौंपे।

पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त रणनीति का असर

यह सफलता लंबे समय से चल रहे गरियाबंद पुलिस, सीआरपीएफ 211वीं बटालियन, कोबरा और ई-30 यूनिट की समन्वित कार्रवाई का परिणाम है। अभियान का नेतृत्व आईजी रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा और एसपी निखिल राखेचा के निर्देशन में किया गया। पुलिस ने “कम्युनिटी पुलिसिंग” और “पुनर्वास अभियान” के तहत नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।

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आत्मसमर्पण समारोह में आईजी अमरेश मिश्रा, एसपी निखिल राखेचा, सीआरपीएफ कमांडेंट विजय प्रताप और द्वितीय अधिकारी रंजन बाहली उपस्थित रहे। सभी ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फूलमाला पहनाकर समाज में पुनर्वास के लिए शुभकामनाएं दीं।

20 वर्षों से सक्रिय थे ये नक्सली

आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे।

  • कमांडर सुनील उर्फ जगतार सिंह, हरियाणा निवासी, 2004 से माओवादी संगठन से जुड़ा था और झारखंड, हिमाचल, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में कई हमलों का नेतृत्व कर चुका है।
  • अरीना टेकोम उर्फ मुरगु, 2005 से सक्रिय थी और इंसानगंज व सीतलमाझी एरिया कमेटी की सचिव रह चुकी है।
  • अन्य नक्सली — विद्या, लुद्रो, नंदनी, कांति और मललेश — 2009 से 2024 तक संगठन के विभिन्न स्तरों पर हथियारबंद गतिविधियों में शामिल रहे।

बड़ी घटनाओं में रही संलिप्तता

उदंती एरिया कमेटी के इन नक्सलियों का नाम कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है —

  • मई 2018, ग्राम आमामोरा — पुलिस पर हमले में दो जवान शहीद हुए।
  • जनवरी 2022, देवझर पहाड़ी मुठभेड़ — एक पुलिसकर्मी की शहादत।
  • मई 2023, करसलार और जनवरी 2025, कांगरसर मुठभेड़ — सक्रिय भागीदारी रही।

इन घटनाओं ने गरियाबंद और आसपास के इलाकों में नक्सलियों के प्रभाव को मजबूत किया था, लेकिन अब यह आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

एसपी बोले — “गरियाबंद में नक्सलवाद की जड़ें हिल गई हैं”

एसपी निखिल राखेचा ने कहा —
“गरियाबंद पुलिस की लगातार कोशिशों और जनता के सहयोग से यह ऐतिहासिक सफलता मिली है। जो लोग कभी जंगलों में हिंसा फैलाते थे, आज वे विकास की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। यह हमारे जिले में शांति और विश्वास का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार विश्वास निर्माण, पुनर्वास योजनाओं और संवाद की पहल जारी रहेगी, ताकि शेष नक्सली भी आत्मसमर्पण के लिए आगे आएं।

शासन की पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत इनाम राशि, आवास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए आवश्यक सहायता दी जाएगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

पुलिस की अपील — “हिंसा छोड़ें, विकास से जुड़ें”

गरियाबंद पुलिस ने बाकी नक्सलियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण कर शासन की योजनाओं का लाभ लें और समाज के विकास में योगदान दें। पुलिस ने इसके लिए नक्सल सेल गरियाबंद (संपर्क नंबर: 94792-27805) जारी किया है।

नया अध्याय — गरियाबंद में शांति और विश्वास की दिशा

इस आत्मसमर्पण के साथ ही उदंती एरिया कमेटी का लगभग सफाया हो गया है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में गरियाबंद जिला पूरी तरह नक्सलमुक्त होकर विकास और निवेश का केंद्र बन सकता है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जनता और प्रशासन के बीच बढ़ता विश्वास नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी जीत है। अब गरियाबंद का जंगल हिंसा से नहीं, बल्कि विकास की कहानी से पहचाना जाएगा।



Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.