विश्व प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा पर्यटकों के लिए खुली, पहले ही दिन उमड़ी भीड़। रहस्यमयी गुफा की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था में आई रौनक।
जगदलपुर। बस्तर के प्राकृतिक वैभव और रहस्यमयी सौंदर्य का प्रतीक विश्व प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा एक बार फिर सैलानियों के लिए खोल दी गई है। मौसम अनुकूल होते ही वन विभाग ने गुफा को पर्यटकों के लिए खोलने की घोषणा की, जिसके बाद पहले ही दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचे।
गुफा के भीतर प्रवेश के साथ ही लोगों ने प्राकृतिक शिल्प, चूना पत्थर की संरचनाओं और टपकते जलकणों से बनी कलाकृतियों को देखकर आश्चर्य प्रकट किया।
कुटुमसर गुफा को देखने के लिए पर्यटकों में काफी उत्साह देखा गया। सुबह से ही इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में भीड़ उमड़ पड़ी। पर्यटन विभाग के अनुसार, पहले दिन लगभग 250 से अधिक पर्यटकों ने गुफा का भ्रमण किया, जिसमें छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से आए लोग प्रमुख रहे।
रहस्यमयी सुंदरता और वैज्ञानिक महत्व
कुटुमसर गुफा लगभग 330 मीटर लंबी और 35 मीटर गहरी है। यह भारत की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफाओं में से एक मानी जाती है।
गुफा के भीतर स्टैलैक्टाइट और स्टैलैग्माइट संरचनाएं (चूना पत्थर से बनी लटकती और उभरती आकृतियाँ) प्राकृतिक रूप से हजारों वर्षों में बनी हैं, जो देखने वालों को अद्भुत अनुभव कराती हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए प्रकाश व्यवस्था, ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम और गाइडेड टूर की व्यवस्था की गई है। गुफा के अंदर मोबाइल कैमरा और फ्लैश फोटोग्राफी पर रोक लगाई गई है ताकि संरचनाओं को नुकसान न पहुंचे।
पहले दिन उमड़ा जनसैलाब
जैसे ही कुटुमसर गुफा के द्वार खुले, देशभर से आए पर्यटक वहां पहुंचने लगे। परिवारों, विद्यार्थियों, और फोटोग्राफरों में उत्साह देखा गया।
स्थानीय गाइड ललित नेताम ने बताया,
“हर साल अक्टूबर-नवंबर में गुफा खोले जाने का इंतजार रहता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य दुनिया के किसी भी चमत्कार से कम नहीं है।”
गुफा के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा कर्मियों और फॉरेस्ट गार्ड्स को तैनात किया गया है। अंदर एक समय में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
पर्यटन से बढ़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था
गुफा खुलने के साथ ही स्थानीय कारीगरों, दुकानदारों और गाइडों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। कुटुमसर और आसपास के इलाकों में पर्यटन सीजन शुरू होते ही आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं।
स्थानीय व्यापारी रामचंद्र नेताम ने बताया,
“गुफा खुलने से हमें रोज़गार मिलता है। चाय-नाश्ते से लेकर हस्तशिल्प बिक्री तक सबमें तेजी आ जाती है।”
पर्यटन विभाग का कहना है कि इस वर्ष कुटुमसर गुफा में लगभग 50 हजार से अधिक पर्यटकों के आने का अनुमान है। इससे न केवल बस्तर पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
कुटुमसर गुफा : प्रकृति का अजूबा
कुटुमसर गुफा की खोज 1900 के दशक के प्रारंभ में स्थानीय लोगों द्वारा की गई थी, जबकि वैज्ञानिक अध्ययन 1958 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण दल ने शुरू किया।
गुफा के अंदर मछलियों और चमगादड़ों की दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। खास बात यह है कि यहां की मछलियाँ बिना आंखों वाली प्रजाति (blind fish) हैं, जो पूरी तरह अंधेरे में जीवनयापन करती हैं। यह दुनिया के कुछ चुनिंदा स्थानों में ही पाया जाने वाला जैविक चमत्कार है।
गुफा तक पहुंचने की सुविधा में सुधार
वन विभाग और पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से कुटुमसर गुफा तक जाने के सड़क मार्ग, पार्किंग और टिकटिंग सिस्टम में सुधार किया है।
अब ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे पर्यटकों को आसानी होगी।
इसके अलावा, इको-टूरिज्म के तहत प्रकृति भ्रमण, बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी ट्रेल्स की शुरुआत भी की जा रही है।
पर्यटन अधिकारी आर.के. दुबे ने बताया —
“हमारा लक्ष्य है कि कुटुमसर गुफा को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जाए। यहां पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।”
बस्तर के पर्यटन स्थलों में नई ऊर्जा
कुटुमसर गुफा के खुलने से बस्तर के अन्य पर्यटन स्थलों — तिरथगढ़ जलप्रपात, मेंद्री गुफा, कोटनार घाटी, दलदली वन क्षेत्र — में भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अनुसार, इस वर्ष बस्तर में लगभग 1.5 लाख पर्यटकों के आने की उम्मीद है।
स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कंट्रोल रूम, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और आपातकालीन रेस्क्यू टीम की व्यवस्था की है।
पर्यटकों के लिए निर्देश
वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे गुफा के भीतर कचरा न फैलाएं, प्लास्टिक का उपयोग न करें, और संरचनाओं को न छुएं।
इसका उद्देश्य है कि इस प्राकृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
समापन
कुटुमसर गुफा का दोबारा खुलना सिर्फ एक पर्यटन घटना नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सामंजस्य का उत्सव है।
यह गुफा न केवल बस्तर की पहचान है, बल्कि छत्तीसगढ़ की जैव-विविधता, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।








