LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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छत्तीसगढ़

महासमुंद में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही: एंबुलेंस ड्राइवर ने मरीज को लगाया टांका, जांच टीम गठित, FIR भी दर्ज होगी

महासमुंद सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस ड्राइवर ने मरीज को लगाया टांका, फोटो वायरल, BMO ने जांच टीम गठित की, CMHO बोले-FIR दर्ज होगी।

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा में एक घायल मरीज के सिर में टांका लगाने का जिम्मा एंबुलेंस ड्राइवर ने संभाला। घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

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तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि मरीज के सिर पर टांके लगाते समय ड्रेसर और हेल्पर मौजूद थे, जबकि यह कार्य केवल प्रशिक्षित चिकित्सक या नर्स के द्वारा किया जाना चाहिए था। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि घायल मरीज को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। लेकिन वहां उपलब्ध प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ अनुपस्थित था, जिसके कारण एंबुलेंस ड्राइवर को असामान्य रूप से टांके लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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घटना का पता चलने के बाद ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) ने तुरंत जांच टीम गठित की है। टीम में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य निरीक्षक शामिल हैं। उन्होंने अस्पताल के रिकॉर्ड, स्टाफ ड्यूटी रजिस्टर और मरीज की स्थिति की जांच शुरू कर दी है।

CMHO (Chief Medical & Health Officer) ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले में FIR दर्ज की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग में ऐसी लापरवाही किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति और जिम्मेदारी की अनदेखी गंभीर चिकित्सा त्रुटियों का कारण बन सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही और निगरानी की कमी ने मरीज की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा कि अस्पतालों में नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी और क्षमता सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइन लागू की जाएंगी।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि अस्पतालों में ऑडिट और निगरानी प्रणाली मजबूत की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति और गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा चिकित्सा कार्यों को अंजाम देना मरीजों के लिए गंभीर खतरा है।

घटना ने यह भी उजागर किया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। वायरल हुई तस्वीरों की वजह से स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और मामले की गंभीरता को पहचाना।

स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही अस्पताल में सुरक्षा और चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

यह घटना छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी है कि प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं में कर्मचारियों की प्रशिक्षण और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति न केवल मरीज की जान के लिए खतरा है, बल्कि विभाग की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।

अंततः, महासमुंद की यह घटना यह संदेश देती है कि स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए विभागीय स्तर पर सख्त मानक और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.