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India gets ‘Drishti’: An unblinking eye in the sky on Pak, China borders; PM Modi hails milestone

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बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप गैलेक्सीआई (GalaxEye) ने रविवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब उसने अपने पहले वाणिज्यिक उपग्रह ‘दृष्टि’ (Drishti) को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। इस उपग्रह को कंपनी ने ‘दुनिया का पहला ऑप्टोएसएआर (OptoSAR) सैटेलाइट’ बताया है, जो पृथ्वी अवलोकन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। यह प्रक्षेपण वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को और मजबूत करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है, इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर भारत की ‘अचूक निगरानी’ के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिससे देश की सुरक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

‘मिशन दृष्टि’ भारत का सबसे बड़ा निजी तौर पर विकसित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसका वजन 190 किलोग्राम है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया का पहला ऐसा उपग्रह है जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) सेंसर को एक ही परिचालन प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है। यह अनूठी क्षमता दृष्टि को हर मौसम में, दिन और रात, उच्च गुणवत्ता वाली छवियां लेने में सक्षम बनाती है। जहां पारंपरिक ऑप्टिकल उपग्रह बादलों और अंधेरे से प्रभावित होते हैं, वहीं रडार उपग्रह दिन-रात काम कर सकते हैं और बादल, धुआं या बारिश को भेद सकते हैं, हालांकि उनकी इमेजरी को समझना अक्सर मुश्किल होता है। गैलेक्सीआई का कहना है कि दृष्टि इन दोनों डेटा स्ट्रीम को सिंक्रनाइज़ और संयोजित करके उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सुसंगत और उपयोगी इमेजरी उत्पन्न कर सकता है, जो पहले संभव नहीं था। यह बादलों, अंधेरे और खराब मौसम में भी स्पष्ट रूप से ‘देख’ सकता है, जबकि पारंपरिक ऑप्टिकल इमेजरी भी कैप्चर करता है।

इस अत्याधुनिक उपग्रह की क्षमताएं विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली हैं। ‘दृष्टि’ से प्राप्त होने वाली जानकारी का उपयोग सीमा निगरानी और रक्षा गतिविधियों के अलावा आपदा प्रतिक्रिया, कृषि, बुनियादी ढांचा योजना और बीमा मूल्यांकन जैसे नागरिक अनुप्रयोगों में भी किया जा सकेगा। उदाहरण के लिए, बाढ़, चक्रवात या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जब घने बादल पारंपरिक ऑप्टिकल उपग्रहों को चित्र लेने से रोकते हैं, तब भी रडार इमेजिंग लगातार काम कर सकती है। गैलेक्सीआई के सह-संस्थापक और सीईओ सुयश सिंह ने बताया कि उपग्रह में एनवीडिया के जेटसन ओरिन कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रोसेसिंग की सुविधा भी है। इसका मतलब है कि विश्लेषण के लिए कच्ची इमेजरी की भारी मात्रा को पृथ्वी पर भेजने के बजाय, प्रोसेसिंग का एक हिस्सा सीधे कक्षा में ही होगा। इससे उपग्रह इमेजरी को कार्रवाई योग्य जानकारी में बदलने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह उपग्रह 1.5 मीटर के उच्च रिज़ॉल्यूशन पर इमेजरी प्रदान कर सकता है और हर सात से दस दिनों में वैश्विक स्थानों का पुनरीक्षण करने की क्षमता रखता है।

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लगभग एक कॉम्पैक्ट रेफ्रिजरेटर के आकार का यह अंतरिक्ष यान लगभग साढ़े तीन मीटर का एक डिप्लॉयबल एंटीना भी साथ ले जाता है। गैलेक्सीआई ने पहले ड्रोन, सेसना विमान और उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफार्मों का उपयोग करके लगभग 500 हवाई उड़ानों के माध्यम से अपने इमेजिंग सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने इसरो के पीएसएववी मिशन के तहत पीओईएम (POEM) प्लेटफॉर्म पर भी एक पेलोड उड़ाया था, जिससे उसकी तकनीकी दक्षता साबित हुई। इस परियोजना में रक्षा और नागरिक दोनों एजेंसियों की गहरी रुचि सामने आई है। कंपनी ने बताया है कि भारतीय रक्षा और कृषि मंत्रालयों सहित कई सरकारी विभागों के साथ चर्चा हुई है, जबकि रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी, भारतीय वायु सेना, सेना और नौसेना जैसी एजेंसियां भी इस कार्यक्रम पर लगातार नजर रख रही हैं। गैलेक्सीआई ने विभिन्न वितरण समझौते भी किए हैं, जो इस तकनीक की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेंगे।

कुल मिलाकर, ‘दृष्टि’ उपग्रह का सफल प्रक्षेपण भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान पर स्थापित करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास व आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व योगदान देने की क्षमता रखता है।

Source: Original Article ↗

Heshma lahre
लेखक / Author

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.

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