राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” का संदेश योग के माध्यम से विश्व कल्याण और वैश्विक एकता का मार्ग प्रशस्त करता है।
रायपुर। “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” — यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि मानवता, पर्यावरण और वैश्विक कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने रायपुर में आयोजित राज्यस्तरीय योग कार्यक्रम में कहा कि भारत आज योग के माध्यम से विश्व कल्याण की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। इसी संतुलन से “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” का आदर्श साकार हो सकता है।
योग — भारतीय संस्कृति की विश्व को दी अमूल्य देन
श्री वर्मा ने कहा कि प्राचीन भारत ने हजारों वर्ष पूर्व योग के माध्यम से वह मार्ग दिखाया था, जिसे आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी स्वीकार कर रहा है।
योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का आधार है, बल्कि सामूहिक मानसिक और पर्यावरणीय संतुलन का भी माध्यम है।
उन्होंने कहा —
“जब हर व्यक्ति स्वस्थ होगा, तभी समाज और पृथ्वी भी स्वस्थ रह पाएगी। यही योग का वास्तविक संदेश है — व्यक्तिगत साधना से वैश्विक कल्याण तक।”
“एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” की अवधारणा
राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई ‘One Earth, One Health’ (एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य) की परिकल्पना संपूर्ण विश्व के लिए दिशा-सूचक बन गई है।
यह विचार इस बात पर आधारित है कि मनुष्य, पशु, वनस्पति और पर्यावरण — ये सभी एक ही पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से हैं।
योग इसी समग्र स्वास्थ्य दर्शन (Holistic Health Philosophy) को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा —
“यदि हम योग और प्रकृति के साथ समरसता में रहना सीख जाएं, तो बीमारियाँ, तनाव और असंतुलन स्वतः दूर हो जाएंगे।”
छत्तीसगढ़ में योग आंदोलन को नई दिशा
श्री वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार योग को स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनशैली सुधार का महत्वपूर्ण अंग बना रही है।
राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में “योग आपके द्वार” अभियान चलाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और बस्तर जिलों में योग प्रशिक्षण शिविर, ध्यान सत्र और सामूहिक योग अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं।
इससे लोगों में न केवल शारीरिक स्फूर्ति आई है, बल्कि मानसिक शांति और सामाजिक एकता भी मजबूत हुई है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का अद्भुत संगम
“एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” का संदेश यह भी सिखाता है कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव स्वास्थ्य का संरक्षण है।
योग इसी संतुलन को बनाए रखने का साधन है।
श्री वर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और असंतुलित जीवनशैली ने आज पूरे विश्व को संकट में डाल दिया है।
ऐसे समय में योग हमें यह याद दिलाता है कि मनुष्य प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा —
“योग से न केवल शरीर स्वस्थ होता है, बल्कि यह हमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी देता है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका
राजस्व मंत्री ने कहा कि आज दुनिया भर में योग की लोकप्रियता भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व की प्रतीक है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करना भारत के लिए गौरव की बात है।
आज 180 से अधिक देशों में योग अभ्यास को अपनाया गया है, जिससे “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” का भारतीय विचार वैश्विक नीति का हिस्सा बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा —
“भारत अब केवल योग का जनक देश नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संतुलन का मार्गदर्शक भी बन गया है।”
युवाओं और समाज के लिए संदेश
श्री टंक राम वर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा —
“मोबाइल और डिजिटल दुनिया के इस युग में युवाओं के लिए मानसिक शांति उतनी ही जरूरी है जितनी शारीरिक फिटनेस। योग दोनों का संतुलन साधता है।”
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही ‘युवा योग मिशन’ शुरू करने जा रही है, जिसमें कॉलेज छात्रों को नियमित योग और ध्यान प्रशिक्षण दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की परंपरा में योग का गहरा संबंध
छत्तीसगढ़ की परंपरा में प्रकृति, साधना और जीवनशैली हमेशा से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं।
ग्राम्य जीवन की सरलता, सुबह की दिनचर्या और खेतों के कामकाज में भी योग के सिद्धांत समाहित हैं।
राजस्व मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग की उस आत्मा को पुनर्जीवित कर रहा है, जो स्वास्थ्य और संस्कृति दोनों को एक सूत्र में बांधती है।
योग से बनेगा आत्मनिर्भर समाज
योग न केवल स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि व्यक्ति में अनुशासन, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच का विकास करता है।
ऐसे व्यक्ति आत्मनिर्भर और समाजोपयोगी बनते हैं।
श्री वर्मा ने कहा —
“योग से व्यक्ति स्वयं में संतुलित होता है, और जब हर नागरिक संतुलित होगा, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त बन जाएगा।”
योग — विश्व को जोड़ने वाला सेतु
राजस्व मंत्री ने कहा कि आज योग विश्व को जोड़ने वाला सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु बन चुका है।
पूर्व से पश्चिम तक, योग ने संस्कृतियों के बीच की सीमाएँ मिटा दी हैं।
“एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” की यही भावना मानवता को एक सूत्र में जोड़ रही है।
उन्होंने अंत में कहा —
“भारत की प्राचीन साधना अब वैश्विक चेतना का आधार बन रही है। यह गर्व का क्षण है कि विश्व कल्याण की दिशा में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”
सारांश में
रायपुर से लेकर दुनिया के हर कोने तक, योग आज स्वास्थ्य, शांति और सहअस्तित्व का प्रतीक बन चुका है।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का यह संदेश न केवल भारत की सांस्कृतिक जड़ों की याद दिलाता है, बल्कि आधुनिक समय में “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” के वैश्विक विचार को भी मजबूत करता है।
भारत योग के माध्यम से न केवल विश्व को स्वास्थ्य का मार्ग दिखा रहा है, बल्कि यह भी बता रहा है —
“जब मनुष्य प्रकृति से जुड़ता है, तभी सृष्टि में संतुलन आता है।”








