रायपुर। राज्य के 46 प्रमुख जलाशयों में औसतन 50% से अधिक जलभराव, खारंग और खपरी जलाशय पूरी तरह भरे, सतत निगरानी के निर्देश।
छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के चलते राज्य के प्रमुख सिंचाई जलाशयों में तेजी से जलभराव हो रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा 19 जुलाई को जारी टैंक गेज रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसतन 49.78 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है।
खारंग और खपरी जलाशय लबालब
बिलासपुर जिले स्थित खारंग डेम और दुर्ग जिले का खपरी जलाशय शत-प्रतिशत जलभराव के साथ पूरी तरह भर चुके हैं। ये दोनों जलाशय राज्य के उन चुनिंदा जल स्रोतों में शामिल हैं, जिनमें इस समय सबसे अधिक जल स्तर दर्ज किया गया है।
छोटे जलाशयों की स्थिति
राज्य के कई अन्य जलाशयों में भी जलस्तर संतोषजनक स्थिति में पहुँच चुका है।
झुमका जलाशय (कोरिया): 98.84%
मनियारी जलाशय (मुंगेली): 93.17%
छिरपानी जलाशय (कबीरधाम): 91.14%
खमारपकुट डेम: 86.11%
किंकारी नाला: 80.31%
सुखा नाला बैराज: 72.95%
इन जलाशयों का जल स्तर कृषि सीजन के लिए फायदेमंद माना जा रहा है और इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वृहद जलाशयों की स्थिति
कुछ बड़े जलाशयों में भी औसत से बेहतर जलभराव देखने को मिला है:
मिनीमाता बांगो डेम (कोरबा): 52.78%
रविशंकर सागर, गंगरेल (धमतरी): 53.26%
सिकासार डेम: 45.21%
धारा जलाशय (राजनांदगांव): 46.44%
रूसे डेम: 54.47%
वहीं, कुछ जलाशयों में जलभराव अभी अपेक्षाकृत कम बना हुआ है:
तांडुला डेम (बालोद): 29.29%
दुधावा डेम: 21.87%
मुरूमसिल्ली डेम: 21.57%
कोडार डेम: 38.11%
केलो डेम: 30.96%
कम जलस्तर वाले जलाशय
अभी भी कुछ जलाशयों में जल स्तर 30% से भी कम है, जिनमें शामिल हैं:
अरपा भैंसाझार (बिलासपुर)
मायना डेम (कांकेर)
गोंदली डेम (बालोद): 30.24%
खरखरा डेम: 22.15%
बलार डेम: 23.04%
मोंगरा बैराज: 62.62%
मरोदा जलाशय: 38.62%
सरोदा दादर: 41.03%
मटियामोती जलाशय: 28.51%
सतत निगरानी के निर्देश
जल संसाधन विभाग ने सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों को जलाशयों की सतत निगरानी करने और जल स्तर पर नजर रखने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने बताया है कि खारंग, मनियारी, केलो और सीतानदी बेसिन के जलाशयों से नहरों और स्लूइस गेट के माध्यम से जल निकासी की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है, ताकि जल नियंत्रण को संतुलित रखा जा सके।
कृषि के लिए फायदेमंद स्थिति
राज्य के कई हिस्सों में जलाशयों का यह जलस्तर धान और खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए वरदान साबित हो सकता है। विशेष रूप से मनियारी, खपरी और झुमका जैसे जलाशयों में जल भराव किसानों की चिंता कम कर सकता है।
निष्कर्ष रूप में
वर्तमान जलस्तर यह संकेत देता है कि अगर बारिश इसी गति से होती रही, तो आने वाले दिनों में राज्य के अधिकांश जलाशयों में पूर्ण जलभराव की स्थिति बन सकती है। जल संसाधन विभाग द्वारा किए गए नियमित मॉनिटरिंग और समय पर जल निकासी से संभावित बाढ़ की स्थिति पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है।










